नवादा : जिले में पिछले पांच दिनों में पुलिस व चौकीदारों पर हमले की लगातार तीन घटनाओं से पुलिस की साख पर बट्टा लग रहा है। फिर सवाल यह कि कहीं शराब-बालू माफियाओं की पुलिस से गठजोड़ तो नहीं? ऐसा देखा जा रहा है कि थाने में वैसे तत्व भरे पड़े हैं जिन्हें इसकी कोई आवश्यकता नहीं। अब सबसे बड़ा सवाल वहां वे करते क्या हैं? फिर थानाध्यक्षों द्वारा थाने में निजी वाहन चालक की आवश्यकता है? या फिर थाने में मुंशी का काम चौकीदार को करने की इजाजत पुलिस मैन्युअल देती है? ऐसे में अगर खाकी वर्दी पर हमला हो रहा है तो इसका जिम्मेदार कौन?
पहली घटना 06 मई को हुई जिसमें शराब माफियाओं द्वारा काशीचक पुलिस पर हमला किया गया जिसमें तीन सब इंस्पेक्टर समेत छह पुलिसकर्मी घायल हुए। काशीचक पुलिस शराब को लेकर थाना क्षेत्र के बिरनामां गांव में छापेमारी के लिए गयी थी। इसी बीच शराब माफियाओं ने पुलिस पर लाठी-डंडा व ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया। बाद में अतिरिक्त पुलिसबलों की मदद से छापेमारी कर आरोपितों में से 11 लोगों को पकड़ा गया जिसमें एक विधि विरुद्ध किशोर बताया जाता है।
इस मामले में काशीचक थाने में 07 मई को कांड संख्या-64/26 दर्ज है जिसमें 14 नामजद व 30 अज्ञात आरोपित हैं। दूसरी घटना कादिरगंज में 10 मई को तब हुई जब बालू माफियाओं ने कादिरगंज के एक चौकीदार पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। घटना कादिरगंज थाना क्षेत्र के बेरमी मोड़ के समीप की है। बुरी तरह से घायल चौकीदार को सदर अस्पताल लाया गया। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया।
घटना के वक्त पुलिस सकरी नदी से बालू लदा ट्रैक्टर जब्त कर ले जा रही थी। माफियाओं का आरेाप था कि चौकीदार ने ही पुलिस को सूचना देकर ट्रैक्टर जब्त कराया। तीसरी घटना धमौल थाना क्षेत्र की है। जहां तुर्कवन गांव व धमौल थाने के बीच रास्ते में 10 मई की रात करीब 8:15 बजे एक चौकीदार को चाकू से गोद दिया गया जिससे उसकी इलाज के दौरान पीएमसीएच में मौत हो गयी। मृतक की पत्नी ने शराब माफिया पर हत्या करने का आरोप लगाया है। मामले में पुलिस ने आरोपितों में से एक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
भईया जी की रिपोर्ट