नवादा : खुद्दारी क्या होती है? यह कोई मोहम्मद नाफीस से सीखे। पन्द्रह दिनों तक मुँह में अनाज तक नहीं डाला, लेकिन किसी से यह नहीं कहा कि वह भूखा है। तबीयत ज्यादा खराब होने पर समाजसेवियों ने जब डॉक्टर से उसे दिखाया तब मालूम हुआ कि उसके पेट में अनाज का एक भी दाना नहीं है। 35 वर्षीय नाफीस नवादा जिलान्तर्गत नरहट का रहनेवाला है। वह अपनी माँ और एक बहन के साथ नरहट में रहता है। एक पखवारे से अधिक समय से उसकी माँ इलाज के लिए कोलकाता गयी हुई हैं।
नरहट में वह अपनी बहन के साथ रह रहा है। गाँव के लोग बताते हैं कि नाफीस की बहन मानसिक तौर पर स्वस्थ नहीं है। यही वजह है कि उसने अपने भाई पर कोई ध्यान नहीं दिया। नाफीस ने भी अपनी बहन से खाना नहीं मांगा और इतने दिनों से भूखा रहा। तबीयत जब ज्यादा खराब हुई तो किसी ने समाजसेवी एवं जदयू के पूर्व प्रदेश महासचिव मंजूर आलम को दी। उन्होंने स्थानीय स्तर पर उसका इलाज करवाने की कोशिश की तो मालूम हुआ कि उसके पेट में पिछले कई दिनों से अनाज का दाना नहीं रहने से स्थिति काफी खराब हो चुकी है और उसका इलाज स्थानीय स्तर पर सम्भव नहीं है। तब नाफीस को पटना ले जाया गया लेकिन वहाँ भी चिकित्सकों ने उसे भर्ती लेने से इनकार कर दिया।
मंजूर आलम, जिला पार्षद एवं जदयू के नवादा जिलाध्यक्ष राजकिशोर प्रसाद दांगी एवं समाजसेवी मोहम्मद हजरत और मोहम्मद फुरकान सहित नरहट के अन्य लोग विधान पार्षद सह जदयू के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार के सहयोग से पटना के पीएमसीएच में भर्ती करवाने में सफल हुए। वहाँ उसे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती करवाया गया है। रूम नम्बर 120 और बेड नम्बर चार आवंटित कर इलाज शुरू कर दिया गया है। चिकित्सकों के मुताबिक, भूखे रहने की वजह से उसके दिमाग में कुछ खराबी आ गयी है जिसे ऑपरेशन कर दूर किया जायेगा। अब लोग उसकी सलामती की दुआ कर रहे हैं।
भईया जी की रिपोर्ट