नवादा : कहते हैं एक सत्य को छिपाने के लिए कितना ही झूठ बोल लो, सत्य सत्य ही रहेगा। कुछ इसी प्रकार की स्थिति से जिले के बहुचर्चित आरटीआई कार्यकर्ता प्रणव कुमार चर्चिल को गुजरना पड़ा, लेकिन आखिर में सत्य की जीत हुई और झूठ पराजित हुआ। ऐसा खाद्यान्न आपूर्ति विभाग के मुख्य सचिव द्वारा डीएम को तीन सदस्यीय जांच कमिटी द्वारा जांच करा कार्रवाई के आदेश के बाद संभव हो सका। अब जब जांच कमिटी ने अपना प्रतिवेदन डीएम को सौंपा है तो अग्रेत्तर कार्रवाई का इंतजार हर किसी को है।
जी हां! यहां हम बात कर रहे हैं रजौली प्रखंड अमावां पंचायत क्षेत्र के पीडीएस विक्रेता योगेन्द्र पासवान की। फर्जी पीडीएस अनुज्ञप्ति मामले को गंभीरता से लेते हुए आरटीआई कार्यकर्ता ने उम्र से लेकर अन्य कई मामलों को गंभीरता से उठाया था। लेकिन भ्रष्टाचार में लिप्त जिला आपूर्ति पदाधिकारी से लेकर तत्कालीन और वर्तमान रजौली एसडीएम ने मोटी रकम लेकर डीएम को अंधकार में रखकर लम्बे समय तक गलत व्याख्या कर बचाने का काम किया।
मामले में राज्य सूचना आयुक्त ने तत्कालीन एसडीएम पर जुर्माना भी लगाया। जुर्माना जमा कर अपने काले कारनामों पर पर्दा डालने का असफल प्रयास किया,लेकिन सच्चाई तब सामने आई जब तीन सदस्यीय जांच कमिटी ने डीएम को अपना प्रतिवेदन सौंपा। अब सबसे बड़ा सवाल क्या डीएम संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की अनुसंशा करेंगे? फर्जी पीडीएस विक्रेता योगेन्द्र पासवान के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर खाद्यान्न की राशि वसूली की कार्रवाई करेंगे? डीएम की अग्रेत्तर कार्रवाई का इंतजार हर किसी को रहेगा।
भईया जी की रिपोर्ट