नवादा : जिले के वारिसलीगंज प्रखंड के माफी गांव में पांच युवाओं ने मिलकर शिक्षा की ऐसी पहल शुरू की है, जो गांव के बच्चों के लिए मददगार साबित हो रही है। गांव के बच्चों को बेहतर पढ़ाई का माहौल देने के उद्देश्य से इन युवाओं ने अपने प्रयास से ‘मां शारदा पुस्तकालय’ की स्थापना की है. यहां बच्चों को किताबों से लेकर इंटरनेट, वाई-फाई और ऑनलाइन क्लास तक की सुविधा बिल्कुल मुफ्त दी जा रही है। खास बात यह है कि पुस्तकालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सफलता भी अब सामने आने लगी है।
मां शारदा पुस्तकालय की शुरुआत गांव के पांच दोस्तों सौरव सावर्ण, सानु सिंह, गौरव कुमार, गुलशन कुमार और प्रशांत आर्यवंशी ने की है। युवाओं का मकसद गांव के बच्चों को पढ़ाई के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक परेशानी की वजह से किसी की शिक्षा प्रभावित न हो। अपनी इस छोटी सी पहल के जरिए वे गांव में पढ़ाई का माहौल बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
पुस्तकालय में बच्चों के लिए साहित्य, सामान्य ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी किताबें उपलब्ध हैं। इसके अलावा इंटरनेट, वाई-फाई और ऑनलाइन क्लास की सुविधा भी दी जाती है। विद्यार्थियों को जिस विषय या प्रतियोगी परीक्षा की पुस्तक की जरूरत होती है, उसे भी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। यहां पढ़ने या किसी भी सुविधा का लाभ लेने के लिए बच्चों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
पुस्तकालय में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों ने अपनी मेहनत से बेहतर परिणाम हासिल किए हैं। वर्ष 2026 की मैट्रिक परीक्षा में रिया कुमारी ने 475 अंक प्राप्त किए। उनके प्रदर्शन को देखते हुए बिहार बोर्ड ने उन्हें टॉपर वेरिफिकेशन के लिए बुलाया था। हालांकि, कुछ अंकों के अंतर से वह टॉपर बनने से चूक गईं। उनकी उपलब्धि पर पुस्तकालय की ओर से लैपटॉप देकर सम्मानित किया।
इसी तरह सोनम कुमारी ने वर्ष 2025 की इंटरमीडिएट परीक्षा में 433 अंक हासिल की है। उनकी सफलता पर भी पुस्तकालय संचालकों ने उन्हें लैपटॉप उपहार में दिया। यहां पढ़ाई करने वाले मुकेश पंडित ने बिहार पुलिस की परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।हाल ही में पत्रिका ‘सांझा बाती’ की टीम ने माफी गांव पहुंचकर मां शारदा पुस्तकालय का दौरा किया। टीम में पत्रिका के संपादक और गायक-साहित्यकार हेमंत कुमार, सह-संपादक, उद्घोषक एवं कलाकार उमेश बहादुरपुरी, हास्य कवि व लेखक कृष्ण कुमार भट्टा और राजकीय सम्मान प्राप्त शिक्षक एवं लेखक श्रीकांत शामिल थे।
दौरे का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को साहित्य तथा किताबों से जोड़ना था। टीम ने बच्चों को मोबाइल और रील्स की दुनिया से समय निकालकर किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित किया। साथ ही पुस्तकालय में उपलब्ध सुविधाओं और पांचों युवाओं के प्रयास की सराहना करते हुए व्यवस्थापकों को बधाई दी। मां शारदा पुस्तकालय की यह पहल दिखाती है कि सामूहिक प्रयास से गांव में शिक्षा के लिए बेहतर माहौल तैयार किया जा सकता है।
भईया जी की रिपोर्ट
