नवादा : मगध के इतिहास, किसान आंदोलनों और उपेक्षित ऐतिहासिक विरासत को अपने शोध और लेखन के माध्यम से सामने लाने वाले डॉ. अशोक कुमार प्रियदर्शी का चयन मुंगेर विश्वविद्यालय में इतिहास विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुआ है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) की चयन प्रक्रिया में उन्होंने सामान्य श्रेणी में 27 वां रैंक हासिल किया है। लेखन, अध्यापन और शोध से जुड़े डॉ. प्रियदर्शी के लिए यह उपलब्धि उनके लंबे शैक्षणिक और पेशेवर सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
जिले के सदर प्रखंड स्थित घोसतावां गांव निवासी डॉ. प्रियदर्शी का जीवन संघर्षों के बीच आगे बढ़ने की कहानी है। उनके पिता बृजनन्दन सिंह किसान थे, जबकि मां बरती देवी गृहिणी थीं। छह भाई-बहनों में सबसे छोटे प्रियदर्शी के सिर से करीब 10 वर्ष की उम्र में मां और 18 वर्ष की उम्र में पिता का साया उठ गया ,लेकिन उन्होंने अध्ययन और अध्यापन का सिलसिला जारी रखा और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। डॉ. प्रियदर्शी ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने दिवंगत माता-पिता को समर्पित किया है।
मैट्रिक से स्नातकोत्तर तक प्रथम स्थान
डॉ. प्रियदर्शी आंती हाई स्कूल से मैट्रिक की पढ़ाई की। केएलएस कॉलेज से स्नातक किया और सीताराम साहू कॉलेज से इतिहास विषय में ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की। स्नातकोत्तर की पढ़ाई नालंदा कॉलेज बिहारशरीफ से पूरी की। मैट्रिक, स्नातक और स्नातकोत्तर की परीक्षाओं में प्रथम स्थान हासिल किया। इसके अलावा एनवीएम कॉलेज से एलएलबी की। मगध विश्वविद्यालय से विशिष्ट अंकों के साथ पत्रकारिता की डिग्री हासिल की। 2011 से एसकेएम कॉलेज के इतिहास विभाग में अध्यापन कार्य से जुड़े रहे हैं। पिछले तीन दशक से देश के प्रतिष्ठित प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल संस्थानों के लिए लेखन का काम करते रहे हैं।
रेवरा किसान आंदोलन और 1857 के नायकों पर शोध
डॉ. अशोक प्रियदर्शी की पहचान मगध क्षेत्र के इतिहास पर शोधपरक लेखन से रही है। उन्होंने रेवरा किसान आंदोलन, अपसढ़, दरियापुर-पार्वती, देवनगढ़ और रानी गदर के शैलचित्रों जैसे विषयों का अध्ययन किया। जिले के भूले-बिसरे नायकों एतवा और जवाहीर रजवार के योगदान, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका और 1857 तथा 1942 के आंदोलनों के गुमनाम नायकों सहित कई ऐतिहासिक विषयों पर उन्होंने अध्ययन और लेखन किया। डॉ. प्रियदर्शी ने ‘अशोक युगीन भारत और मौर्यों का एक सांस्कृतिक अध्ययन’ विषय पर रिसर्च किया है। इसके अलावा बिहार, खासकर मगध की अनेक ऐसी ऐतिहासिक विरासतों पर लेखन किया है, जिन पर अपेक्षाकृत कम चर्चा हुई है। उनके कई शोधपरक आलेख बिहार और देश के प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशित हुए हैं।
पिता की राह पर बेटियां
डॉ. प्रियदर्शी की तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी अंजली ने इतिहास में एमए के साथ बीएड और बीएलआईएस किया है। वह सीटीईटी, एसटीईटी और नेट उत्तीर्ण हैं। अंजली नवादा के स्थानीय इतिहास पर शोध कर रही हैं। दूसरी बेटी अनामिका ने अंग्रेजी में एमए के साथ बीएड और बीएलआईएस किया है तथा एसटीईटी उत्तीर्ण हैं। छोटी बेटी अंकिता ने अंग्रेजी में स्नातक करने के साथ बीएड और बीएलआईएस की पढ़ाई की है। डॉ. प्रियदर्शी की पत्नी कंचन कुमारी गृहिणी हैं।
मुंगेर विश्वविद्यालय में नई जिम्मेदारी
मगध में अध्ययन, अध्यापन और लेखन के बाद मुंगेर विश्वविद्यालय में अध्यापन की जिम्मेदारी डॉ. प्रियदर्शी के सफर का नया अध्याय है। लेखन, शोध और शिक्षण से अर्जित अनुभव अब विद्यार्थियों के काम आएगा। उनके लिए यह चयन केवल एक पद हासिल करना नहीं, बल्कि इतिहास के अध्ययन और अध्यापन के माध्यम से नई पीढ़ी को अतीत से जोड़ने का अवसर भी है।
1996 से पत्रकारिता में सक्रिय
डॉ. प्रियदर्शी वर्ष 1996 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में काम किया है। दैनिक भास्कर, समाचार पत्र से जुड़े रहने के साथ उन्होंने दूरदर्शन और आकाशवाणी पटना के लिए काम किया। इसके अलावा इंडिया टुडे, आउटलुक हिंदी और बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए बिहार से लेखन किया। यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) से भी जुड़े रहे हैं।पत्रकारिता के दौरान राजनीति, समाज, शिक्षा, संस्कृति और इतिहास से जुड़े विषय उनके लेखन के केंद्र में रहे।
भईया जी की रिपोर्ट