पूर्व सीएम लालू यादव के साले साधु यादव ने बिहार की बिगड़ी कानून व्यवस्था को लेकर एक ऐसा बयान दिया है जिससे महिला पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक इंटरव्यू में अपने अजीब तर्क को सामने रखते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व सीएम नीतीश द्वारा पुलिस बल में महिलाओं की ज्यादा भर्ती के कारण बिहार की कानून व्यवस्था नहीं संभल रही। साधु ने कहा कि महिलाओं को खुद सुरक्षा की जरूरत होती है, वे क्या सुरक्षा दे पायेंगी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश के फैसले को गलत बताते हुए कहा कि महिलाओं को पुलिस की सड़क पर ड्यूटी के बजाय शिक्षक, क्लर्क और कार्यालयों में काम करने का अवसर देना चाहिए। उनके बयान के बाद महिला पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी और कार्यक्षमता को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
साधु यादव ने दावा किया कि महिला पुलिसकर्मियों की वजह से बिहार में कानून-व्यवस्था नियंत्रित नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुरुषों की जरूरत होती है और महिलाओं को दूसरे क्षेत्रों में काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह महिलाओं के विरोध में नहीं हैं। लेकिन उन्हें सड़क पर वर्दी पहनाकर ड्यूटी पर तैनात करना उचित नहीं है। हालांकि, कानून-व्यवस्था की स्थिति और महिला पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर उनके दावों के समर्थन में कोई आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया गया। विदित हो कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान बिहार में महिलाओं के लिए पुलिस भर्ती में 35 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई थी। इसका उद्देश्य पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और उन्हें सरकारी सेवा में अधिक अवसर उपलब्ध कराना रहा है।
महिला पुलिसकर्मी थानों, महिला हेल्प डेस्क, भीड़ प्रबंधन और कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न कार्यों में जिम्मेदारी निभाती हैं। महिलाओं से जुड़े मामलों में शिकायत दर्ज कराने और पुलिस तक अपनी बात पहुंचाने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में अब साधु यादव की टिप्पणी से यह सवाल चर्चा में आ गया है कि क्या पुलिस में महिलाओं की भूमिका को केवल कार्यालयों तक सीमित किया जाना चाहिए। पुलिस का काम कानून लागू करना, नागरिकों की सुरक्षा करना और परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई करना है। इन जिम्मेदारियों का आकलन लैंगिक आधार पर नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, संसाधनों, कार्यप्रणाली और प्रदर्शन के आधार पर किया जाना चाहिए। फिलहाल साधू यादव के इस ताजा बयान पर सरकार या किसी अन्य दल की प्रतिक्रिया आनी बाकी है।
