नवादा : जिले में लंबे समय बाद चीनी मिल खुलने का रास्ता साफ हो गया है। बुधवार 23 सितंबर को हुई बिहार कैबिनेट की मीटिंग में इसकी स्थापना पर आधिकारिक मुहर लग गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पर ऐलान कर दिया है। चीनी मिल नवादा के वारिसलीगंज में स्थापित की जाएगी। इस निर्णय से नवादा समेत चार जिलों के गन्ना किसानों को लाभ होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पर बताया कि वारिसलीगंज में नए चीनी मिल की स्थापना की मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से क्षेत्र में ₹500 करोड़ से अधिक का निवेश होगा। इससे बंद पड़े चीनी उद्योग को नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी है।
चार जिलों के किसानों को सीधा लाभ, हजारों किसानों को मिलेगा फायदा: – मुख्यमंत्री के अनुसार, इस इकाई के शुरू होने से नवादा, नालंदा, शेखपुरा और जमुई के हजारों-हजार गन्ना किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा।
स्थानीय स्तर पर बाजार: -किसानों को अपनी गन्ने की उपज बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही मजबूत बाजार और प्रसंस्करण की सुविधा मिलेगी।
रोजगार के बढ़ेंगे अवसर:- 500 करोड़ से अधिक के भारी निवेश से क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। वारिसलीगंज में नई चीनी मिल की स्थापना को लेकर प्रशासनिक, राजनीतिक और विभागीय स्तर पर कई बड़े कदम उठाए गए हैं। दशकों से बंद पड़ी इस मिल को दोबारा खड़ा करने की कवायद अब धरातल पर उतरती दिख रही है।
प्रस्तावित चीनी मिल को लेकर प्रक्रिया पहले से ही चल रही थी। एक अप्रैल 2026 को बिहार सरकार के गन्ना उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव और स्थानीय अधिकारियों ने वारिसलीगंज के मकनपुर पहुंचकर प्रस्तावित चीनी मिल के लिए चिह्नित जमीन का स्थल निरीक्षण किया था। इस दौरान अधिकारियों ने करीब 100 एकड़ से अधिक चिह्नित भूमि का जायजा लिया था और परियोजना के लिए जमीन की स्थिति, उपलब्धता और उपयोगिता की जानकारी ली थी। स्थल निरीक्षण के बाद से ही क्षेत्र के लोगों को परियोजना के आगे बढ़ने की उम्मीद थी। अब कैबिनेट की मंजूरी मिलने से इस उम्मीद को बल मिला है।
भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने संसद भवन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर वारिसलीगंज में चीनी मिल के शीघ्र संचालन की मांग रखी। उन्होंने इस इकाई के संचालन की जिम्मेदारी ‘इंडियन पोटाश लिमिटेड’ (IPL) को सौंपने का आग्रह किया, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। सीएम नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा और कैबिनेट संकल्प:- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नवादा में अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान चीनी मिल खोलने के संकेत दिए थे। इससे पहले दिसंबर 2025 में कैबिनेट ने बंद व नई चीनी मिलों की स्थापना को लेकर संकल्प लिया था।
जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए वारिसलीगंज के मकनपुर मौजा में करीब 102 एकड़ 7 डिसमिल जमीन (जिसमें सरकारी गैरमजरूआ के साथ लगभग 12 एकड़ रैयती भूमि शामिल है) चिह्नित की। डीएम रवि प्रकाश ने अंचल अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर पूरे नक्शे और दस्तावेजों के साथ प्रस्ताव गन्ना उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव को भेजा। राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में नवादा समेत अन्य नई चीनी मिलों को अगले वर्ष मार्च तक स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया, जिसमें गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
वारिसलीगंज चीनी मिल की स्थापना वर्ष 1952 में बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के कार्यकाल में हुई थी। यह मिल दक्षिण बिहार के गन्ना किसानों और औद्योगिक पहचान की रीढ़ मानी जाती थी और इसे कभी ‘मोहिनी शुगर वर्क्स’ के नाम से जाना गया। अपने स्वर्णिम दौर में इस मिल ने उत्पादन के ऐसे कीर्तिमान रचे कि वर्ष 1976 में भारत सरकार ने इसे देश में सर्वाधिक चीनी उत्पादन के लिए स्वर्ण पदक से सम्मानित किया था।
वर्ष 1977 में बिहार राज्य चीनी निगम (BSSC) ने इसका अधिग्रहण कर लिया। हालांकि, 1980 के दशक के उत्तरार्ध में कुप्रबंधन, वित्तीय संकट और पुरानी तकनीक के कारण मिल घाटे में जाने लगी और अंततः वर्ष 1993 में तत्कालीन सरकार ने इसे पूरी तरह बंद कर दिया। इसके बंद होने से 1,000 से अधिक कर्मचारी बेरोजगार हो गए और नवादा समेत आसपास के जिलों के हजारों किसानों ने गन्ने की खेती छोड़ दी।
कैबिनेट की मंजूरी की खबर के बाद जिलेवासियों में उत्साह है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वारिसलीगंज में चीनी मिल की स्थापना क्षेत्र के आर्थिक और औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। किसानों को अब परियोजना के जल्द धरातल पर उतरने और निर्माण कार्य शुरू होने का इंतजार है। चीनी मिल के शुरू होने से वारिसलीगंज के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी कृषि आधारित उद्योग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भईया जी की रिपोर्ट