– लोक परंपरा को बचाने का लिया संकल्प
नवादा : नगर की प्रसिद्ध सांस्कृतिक संस्था सृजन आर्ट्स सह शकुंतला मेमोरियल म्यूजिक कॉलेज के प्रांगण में श्रावण पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर एक दिवसीय कजरी महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन संस्था के संस्थापक शंभू शरण पाठक एवं कलाकारों ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान कलाकारों ने कजरी गायन और नृत्य की प्रस्तुतियों से लोक संस्कृति की समृद्ध परंपरा को जीवंत किया।

संस्था के संस्थापक शंभू शरण पाठक ने कहा कि सावन के झूले और कजरी महज मनोरंजन का साधन नहीं थे, बल्कि ग्रामीण समाज में आपसी मेल-जोल और सामाजिक एकता को मजबूत करने का माध्यम भी था। सावन में महिलाएं और युवतियां सामूहिक रूप से जुटती थीं, जिससे सामाजिक सौहार्द और सामूहिकता की भावना बढ़ती थी। संस्था के निदेशक विजय शंकर पाठक ने कहा कि सावन की महत्वपूर्ण विरासत कजरी और झूला धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। नई पीढ़ी के कलाकार गांव, स्कूल और कॉलेज स्तर पर कजरी एवं झूला कार्यक्रम आयोजित कर इस लोक परंपरा को संरक्षित कर सकते हैं।
महोत्सव का शुभारंभ रिद्धि गुप्ता ने ‘हरे रामा बरसे लागल सवनवा’ गीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर किया। इसके बाद पल ने ‘रिमझिम बरसे बदरवा’ गीत पर शानदार नृत्य की प्रस्तुति दी। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम के दूसरे चरण में महिला और पुरुष कलाकारों की दो टीमें बनाकर कजरी गायन प्रतियोगिता आयोजित की गयी। दोनों टीमों ने एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी। हालांकि, बेहतर प्रदर्शन के बावजूद किसी भी टीम को विजेता घोषित नहीं किया जा सका।
समापन अवसर पर रूबी बरनवाल ने ‘बरसे बरसे रे बदरवा, बड़ा डर लागे रे रसिया’ गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। जबकि सतीश कुमार ने ‘बरसे बरसे रे पनिया, खेले राधा रनिया रे रामा’ कजरी गाकर कार्यक्रम का समापन किया। महोत्सव में आयुष कुमार, ब्रजकिशोर भारती, फैयाज आलम, सचिन, अंकित कुमार, जैस्मीन कुमारी, सुषमा, निशांत कुमार, रितिका और राज समेत अन्य कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां दीं।

कार्यक्रम के दौरान नृत्य प्रशिक्षक पुरुषोत्तम कुमार, संरक्षक गोपाल कुमार सिन्हा, सुजीत कुमार वर्मा, पुष्प लता कुमारी सहित सभी कलाकारों ने कजरी और झूला जैसी लोक परंपराओं को जीवित रखने का संकल्प लिया। कलाकारों ने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को लोक संस्कृति और पारंपरिक गीत-संगीत से जोड़ने का प्रयास जारी रखा जाएगा।
भईया जी की रिपोर्ट

