-अगस्त में अबतक 18 लोगों की मौत से उठे बिजली व्यवस्था पर सवाल
नवादा : जिले में अगस्त का महीना बारिश के साथ बिजली और वज्रपात से जुड़ी घटनाओं के कारण कई परिवारों के लिए त्रासदी लेकर आया। जिले के अलग-अलग हिस्सों में करंट की चपेट में आने और आकाशीय बिजली गिरने से अबतक कई लोगों की जानें जा चुकी हैं। खेतों में सिंचाई और कृषि कार्य के दौरान करंट की घटनाओं के अलावा रास्ते में बिजली के पोल और तार के संपर्क में आने से भी हादसे हुए। इन घटनाओं के बाद बिजली विभाग की व्यवस्था और जर्जर विद्युत तारों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, वज्रपात की घटनाओं ने भी कई परिवारों को गहरा आघात पहुंचाया है।

मासूम बेटी को बचाने में मां की चली गई जान
विद्युत हादसे का सबसे दर्दनाक मामला 7 अगस्त को परना डाबर गांव में सामने आया। बताया गया कि जमीन के पास झूल रहा हाई वोल्टेज तार हादसे का कारण बना। इसकी चपेट में तीन वर्षीय बच्ची आ गई। बच्ची को करंट की चपेट में आया देख उसकी मां रानी देवी उसे बचाने के लिए दौड़ीं, लेकिन वह भी करंट की चपेट में आ गईं। हादसे में मां और बेटी दोनों की मौत हो गई। घटना के बाद गांव में मातम पसर गया।
खेती और रास्तों में करंट बना जानलेवा
अगस्त में अबतक जिले के विभिन्न प्रखंडों में करंट लगने की कई घटनाएं सामने आईं। 1 अगस्त को परना डाबर में कारीगिद्दी निवासी संजय यादव की खेत में पटवन के दौरान विद्युत स्पर्शाघात से मौत हो गई। 2 अगस्त को अकबरपुर के धोबघट्टी निवासी देवनंदन राजवंशी की खेती के दौरान बिजली के तार के संपर्क में आने से जान चली गई।
इसी दिन रजौली के बिजवन काशीचक मोहल्ले में संतोष कुमार की बिजली के खंभे में उतर रहे करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। 6 अगस्त को नरहट में संजय रावत की करंट लगने से मौत हुई। 14 अगस्त को अकबरपुर क्षेत्र में मुफस्सिल निवासी 19 वर्षीय नीतीश कुमार की बिजली की चपेट में आने से जान चली गई।

21 अगस्त को पकरीबरावां के मठगुलनी में खेत में खाद छिटकने के दौरान जर्जर बिजली तार की चपेट में आने से 61 वर्षीय किसान भरत महतो की मौत हो गई। 21 अगस्त को ही सिरदला में पोल के संपर्क में आने से राजमिस्त्री अनिल पंडित की जान चली गई। 24 अगस्त को वारिसलीगंज के मकनपुर में शशिभूषण शर्मा तथा अपसढ़ में चापाकल के अर्थिंग तार की चपेट में आने से राज किशोर सिंह की मौत हो गई।
वज्रपात ने भी कई परिवारों पर ढाया कहर
बिजली विभाग से जुड़ी घटनाओं के साथ ही आकाशीय बिजली ने भी जिले में कई लोगों की जान ले ली। 12 अगस्त को रजौली थाना क्षेत्र के दरियापुर गांव में धान रोपने आए सीतामढ़ी जिले के तीन मजदूर मनी मांझी, राजेंद्र मांझी और इंद्रजीत मांझी वज्रपात की चपेट में आ गए तीनों की मौके पर मौत हो गई। 11 अगस्त को मेसकौर के मिर्जापुर ढिबरा निवासी 16 वर्षीय नवनीत कुमार की कृषि कार्य के दौरान वज्रपात से मौत हो गई। इसी दिन सीतामढ़ी थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव में घर के बाहर खेल रही आठ वर्षीय सुमिता कुमारी आकाशीय बिजली की चपेट में आ गई।

नारदीगंज में एक साथ चार लोगों की मौत
24 जुलाई को नारदीगंज के सांगोवर गांव में भी वज्रपात की दर्दनाक घटना हुई थी। पहाड़ी के पास खेतों में काम कर रहे लोग बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़े थे इसी दौरान आकाशीय बिजली गिरने से शंभू कुमार (44), सोनू कुमार (10), मदन राजवंशी (55) और मुनेश्वर राजवंशी (55) की मौत हो गई थी। एक साथ चार लोगों की मौत से इलाके में मातम पसर गया था।
वज्रपात पीड़ित परिवारों को चार लाख रुपये की सहायता
आपदा प्रबंधन विभाग के प्रावधानों के तहत वज्रपात से मौत होने पर मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि, लगातार हो रही घटनाओं ने विद्युत व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर तार, खुले या लटके तार तथा स्थानीय स्तर पर की गई विद्युत व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता की जरूरत महसूस की जा रही है।
विद्युत व्यवस्था को लेकर कहते हैं अधिकारी
विद्युत कार्यपालक अभियंता, नवादा अनिल कुमार भारती ने बताया कि बिजली व्यवस्था बहाल रखने और खराब तारों को ठीक करने का काम समय-समय पर किया जाता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पटवन को लेकर स्थानीय स्तर पर बनाई गई विद्युत व्यवस्था कई बार दुर्घटना का कारण बन जाती है। विभाग की ओर से विद्युत व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाती है।
भईया जी की रिपोर्ट
