बिहार में नेपाल से आने वाली बाढ़ का खतरा तो फिलहाल टल गया है, लेकिन उफनती गंगा नदी ने भागलपुर, मुंगेर समेत अपने किनारे स्थित जिलों में तबाही मचानी शुरू कर दी है। भागलपुर से खबर है कि यहां बाढ़ ने विकराल रूप धारण करते हुए शहरी इलाकों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। दियारा क्षेत्रों में तो बुरा हाल था ही अब भागलपुर शहर के निचले इलाकों में गांगा का पानी प्रवेश कर जाने की सूचना है। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के लालबाग प्रोफेसर कॉलोनी में दो फीट तक गंगा की बाढ़ का पानी घुस गया है। कई प्रोफेसर अपना क्वार्टर छोड़कर अन्य जगहों पर शिफ्ट हो गए हैं। कुछ यही हाल टेंट सिटी का भी है जहां घुटने भर से ज्यादा पानी भर गया है। जिला प्रशासन ने सभी संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
टेंट सिटी और प्रोफेसर कॉलोनी डूबी
जानकारी के अनुसार भागलपुर और सुल्तानगंज में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। अजगैबीनाथ से लेकर प्रसिद्ध ‘नमामि गंगे घाट’ तक चारों तरफ सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है। नमामि गंगे घाट की सभी सीढ़ियां और मुख्य गेट के पास तीन फीट से ज्यादा पानी भर चुका है। पर्यटन विभाग द्वारा बनाया गया पंडाल और मुख्य कार्यक्रम स्थल भी डूबने लगा है। इसबीच मुंगेर से भी गंगा के जलस्तर में भारी वृद्धि की खबरें आई हैं। मुंगेर जिले के कुतलूपुर दियारा क्षेत्र के वार्ड नंबर 3 में गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ भीषण कटाव शुरू हो गया है। उपजाऊ जमीन और फसलें लगातार नदी में समा रही हैं। स्थिति की भयावहता को देखते हुए जिला प्रशासन ने कटाव निरोधी कार्य युद्धस्तर पर शुरू करवा दिया है। बताया गया कि मुंगेर में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और कई गांवों में पानी घुस चुका है। भागलपुर और मुंगेर में एनडीआरएफ की नौ टीमें बाढ़ के हालात को देखते हुए तैनात की गई हैं। इसके अलावा दोनों ही जिलों में कंट्रोल रूम बनाकर हालात पर नजर रखी जा रही है।