– गंगा जल की पाइपलाइन बगल से गुजरी, फिर भी प्यासा है सुंदरवन -पीने के पानी के लिए तरस रहा महादलित परिवार
नवादा : राजगीर-बनगंगा से गया जाने वाली मुख्य सड़क के समीप स्थित महादलित बस्ती सुंदरवन इन दिनों भीषण पेयजल संकट से जूझ रही है। विडंबना यह है कि जिस सड़क के किनारे बसे इस गांव के लोग एक-एक बूंद पानी के लिए परेशान हैं, उसी रास्ते से गंगा जल उद्भव योजना के तहत पाइपलाइन के माध्यम से गंगाजल गया की ओर पहुंचाया जा रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि उनके लिए यह स्थिति किसी विडंबना से कम नहीं है। गांव में पर्याप्त पेयजल व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीणों की प्यास फिलहाल लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के पानी के टैंकरों के भरोसे बुझ रही है।
टैंकर आने पर महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग घंटों इंतजार कर पानी भरने के लिए कतार में खड़े दिखाई देते हैं। कई बार टैंकर देर से पहुंचने पर लोगों को दूर-दराज के इलाकों से पानी लाने को मजबूर होना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गरीबों और वंचित वर्गों को प्राथमिकता देने की बात करती है, लेकिन सुंदरवन की तस्वीर इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई देती है। लोगों का सवाल है कि जब गंगा जल की पाइपलाइन उनके गांव के सामने से गुजर रही है, तब भी उन्हें स्वच्छ पेयजल क्यों नहीं मिल पा रहा है? क्या इस योजना का लाभ इस महादलित बस्ती तक नहीं पहुंच सकता?
स्थानीय लोगों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि सुंदरवन में स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि यदि पाइपलाइन से पानी उपलब्ध कराना तत्काल संभव नहीं है, तो कम-से-कम पर्याप्त संख्या में चापाकल, मिनी जलापूर्ति योजना अथवा नियमित जलापूर्ति की व्यवस्था की जाए, ताकि किसी परिवार को पीने के पानी के लिए संघर्ष न करना पड़े। पानी जीवन का आधार है, यह किसी विशेष वर्ग का नहीं बल्कि हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि सुंदरवन जैसे उपेक्षित गांवों की समस्या को प्राथमिकता से दूर कर लोगों को स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराए।
भईया जी की रिपोर्ट