नवादा : जिले में पिछले कुछ दिनों से हो रही मानसूनी बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। आसमान में उमड़ते-घुमड़ते बादलों और तेज हवाओं के साथ शुरू हुई इस बारिश ने जिले के लोगों को दोतरफा अहसास कराया है। एक तरफ जहां महीनों की भीषण गर्मी और उमस से तड़पते लोगों को इस बारिश ने राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक दावों की पोल खोलते हुए शहरी और ग्रामीण इलाकों में आफत खड़ी कर दी है। जिले में बारिश के इस बदले मिजाज से पैदा हुए राहत और आफत के हालातों से अलग-अलग जगहों के लोग गुजर रहे हैं।
किसानों के लिए बारिश राहत वाली साबित हो रही है और तेजी से खेती-किसानी परवान पा रहा है। गर्मी से राहत आमजनों को भी भा रहा है। लेकिन जलजमाव आदि का संकट भी साथ ही झेलने की नौबत बनी हुई है। खेती-किसानी के लिहाज से सब कुछ बेहतर है। धान की रोपनी को नई रफ्तार मिल गई है। जिले के किसान लंबे समय से सूखे जैसे हालात और पानी की किल्लत से जूझ रहे थे। बारिश ने किसानों के चेहरे पर खोई हुई मुस्कान वापस ला दी है। खेतों में पानी जमा होने से धान के बिचड़े यानी मोरी को नया जीवन मिला है। किसान अब बड़े पैमाने पर धान की रोपनी में जुट गए हैं। बारिश ने पानी की जरूरत पूरी कर दी है।
हरे चारे की उपलब्धता से मवेशियों को सुकून
कड़कड़ाती धूप और चारे की किल्लत से बेहाल पशुपालकों के लिए बारिश वरदान बनकर आई है। मैदानों में दूब और हरा चारा फिर से लहलहाने लगा है, जिससे मवेशियों के लिए पौष्टिक चारे की किल्लत दूर होगी। इसके साथ ही, लगातार हो रही बारिश से तालाबों और गड्डों में धीरे-धीरे पानी भर रहा है, जिससे मवेशियों को नहाने और गर्मी से बचने का अच्छा ठिकाना मिल रहा है। दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन में सुधार होने की उम्मीद है।
धुंध छंटी और प्रकृति में लौटी हरियाली
पिछले कई महीनों से धूल, धुएं और प्रदूषण की मार झेल रही नवादा की फिजा अब साफ सुथरी नजर आ रही है। बारिश की बूंदों ने हवा में तैरते धूलकणों को जमीन पर ला दिया है, जिससे वायु गुणवत्ता में बड़ा सुधार हुआ है। जिले के पहाड़ी और मैदानी इलाकों के पेड़-पौधे धुलकर बिल्कुल साफ और हरे-भरे हो गए हैं, जिससे पूरा पर्यावरण बेहद खूबसूरत और जीवंत लग रहा है।
पारा गिरा, उमस भरी गर्मी से मिली मुक्ति
जून और जुलाई की शुरुआती हफ्ते में लोग भीषण गर्मी व उमस से त्रस्त थे। तापमान 40 डिग्री से ऊपर स्थिर हो कर रह गया था। लेकिन लगातार हो रही बारिश ने तापमान में भारी गिरावट दर्ज की है। ठंडी हवाओं के चलने से मौसम सुहाना हो गया है। लोगों को अब घरों में पंखे और एसी के बिना भी सुकून मिल रहा है और रातें आरामदायक हो गई हैं।
भूजल स्तर में सुधार की जगी उम्मीद
जिला पिछले कुछ वर्षों से लगातार गिरते भूजल स्तर की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। चापाकल और बोरिंग दम तोड़ रहे थे। मानसूनी बारिश से जिले के जलस्रोतों, पोखरों और आहर-पाइनों में पानी का संचय शुरू हो गया है। यह पानी धीरे-धीरे जमीन के नीचे जाकर वाटर टेबल को रीचार्ज करेगा, जिससे आने वाले दिनों में पेयजल संकट से काफी हद तक निजात मिलने की उम्मीद है।
आफत : – जलजमाव से शहर के कई इलाकों में परेशानी
बारिश राहत लेकर तो आई, लेकिन नवादा नगर परिषद क्षेत्र के लिए आफत साबित हो रही है। ड्रेनेज सिस्टम संकट का कारण बन रहा है। कई इलाकों में जलजमाव से संकट की स्थिति बन गयी है। शहर के मेन रोड, पुरानी बाजार, वीआईपी कॉलोनी और न्यू एरिया जैसे रिहायशी इलाकों की सड़कों पर जलजमाव परेशान कर रहे हैं। नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे राहगीरों और दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सार्वजनिक स्थलों पर भरा पानी
नवादा का मुख्य बस स्टैंड इस समय पूरी तरह कीचड़ और पानी से सराबोर है, जिससे यात्रियों को बसों में चढ़ने-उतरने के लिए गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। यही हाल सदर अस्पताल परिसर और कुछ सरकारी स्कूलों का भी है। अस्पताल के ओपीडी और वार्डों के बाहर पानी जमा होने से मरीजों और उनके परिजनों को संक्रमण का खतरा सता रहा है। जलजमाव के कारण स्कूली बच्चों को भी क्लास तक पहुंचने में भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आंखमिचौली शुरू
हल्की आंधी और बारिश शुरू होते ही जिले के बिजली विभाग का ढांचा चरमरा गया है। पेड़ की टहनियां गिरने और इंसुलेटर पंक्चर होने की वजह से शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक घंटों बिजली गुल रह रही है। नवादा शहर के कई फीडरों में बिजली गायब रहने से लोगों को एक अलग ही मुसीबत झेलनी पड़ रही है।
सड़कों के गड्ढे बन रहे जानलेवा, रफ्तार थमी
बारिश के कारण नवादा-गया रोड और एनएच-20 के कई हिस्सों सहित ग्रामीण सड़कों की हालत जर्जर हो गई है। सड़कों पर पानी होने की वजह से गड्ढे दिखाई नहीं देते और साथ ही फिसलन की अधिकता से बाइक सवार समेत ऑटो वालों की रफ्तार बेहद धीमी हो गई है। इससे लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में दोगुना समय लग रहा है। ग्रामीण इलाके तो और भी प्रभावित हुए हैं।
भईया जी की रिपोर्ट