नवादा : जिले के किसानों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि मानसून की बारिश में विलंब हो रहा है। अल नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से कम वर्षा का अनुमान है। किसानों को पारंपरिक धान की खेती पर निर्भर रहने के बजाए वैकल्पिक फसलों की खेती करने की सलाह दी जा रही है।
किसान निराश : – जून माह में जरूरत की आधी बारिश भी
जिले के किसानों का हौसला टूटने लगा है। बारिश के इंतजार में उनकी अंखियां पथरा रहीं हैं। मानसून आने में बेतरह विलम्ब होने के कारण सभी की आस निराश में बदल रही है। सारे पूर्वानुमान बार-बार फेल हो रहे हैं। अल नीनो का प्रभाव मानसून के आगमन में विलम्ब का कारण बन रहा है, जिससे किसानों की निराशा बढ़ती जा रही है। हालांकि, अलग-अलग प्रखंडों में बारिश जारी है, लेकिन समग्र रूप से बारिश का इंतजार काफी लम्बा होता जा रहा है। पूरे जिले में इस वर्ष मानसून की रफ्तार और स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। अल-नीनो के सक्रिय होने के कारण मानसून लेट पर लेट होता जा रहा है।
मौसम विशेषज्ञ रौशन कुमार ने बताया कि सामान्य से धीमी गति की बनी हुई मानसून की रफ्तार अच्छे संकेत नहीं हैं। सामान्य परिस्थितियों में 10 जून के बाद कभी भी नवादा में दस्तक देने वाला मानसून इस वर्ष 30 जून तक जिले में प्रवेश नहीं कर पाया है। वर्ष 2023 जैस3 भीषण सूखा:- प्रभावित वर्षों में भी मानसून 25 जून से पहले आ गया था, लेकिन इस बार स्थिति उससे भी बदतर नजर आ रही है। बीते पांच सालों के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2021 में 17 जून, 2022 में 18 जून, 2023 में 22 जून, 2024 में 28 जून तथा वर्ष 2025 में 18 जून तक मानसून का जिले में प्रवेश हो गया था। लेकिन, चालू वर्ष 2026 का इंतजार 30 जून के बाद भी जारी है।
अल-नीनो ने कर रखा है सब उलट-पुलट
मौसम विशेषज्ञ रौशन कुमार ने बताया कि प्रशांत महासागर में सक्रिय अल-नीनो की स्थिति मानसून के कमजोर पड़ने का मुख्य कारण बनी हुई है। सामान्य परिस्थितियों में पूर्व से पश्चिम की ओर चलने वाली ट्रेड विंड्स गर्म समुद्री जल को एशिया और ऑस्ट्रेलिया की ओर धकेलती हैं, जिससे बादलों का निर्माण होता है और भारतीय मानसून को ऊर्जा मिलती है। लेकिन जब ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, तो समुद्र का संतुलन बिगड़ जाता है।
गर्म पानी वापस मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की ओर फैलने लगता है, जिससे समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसी स्थिति को वैज्ञानिक रूप से अल-नीनो कहा जाता है, जिसके कारण मानसून की ऊर्जा कम हो गई है और इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है।अल-नीनो का प्रभाव इस बार पूरे सीजन में तंग करता रहेगा। बारिश सामान्य रूप से इस खरीफ सीजन में कम ही रह सकती है। बारिश के दिनों के बीच भी गर्मी अपने तेवर दिखाती रहेगी। यानी कभी बादल-बारिश तो कभी उमस और गर्मी साथ-साथ चलती रहेगी।
वैकल्पिक खेती करें किसान, नहीं तो होगा नुकसान
मौसम विशेषज्ञ रौशन कुमार ने मौसम के मिजाज को देखते हुए किसानों वैकल्पिक खेती अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अल-नीनो के सक्रिय रहने के कारण जिले में सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका है। यह अभी से ही साफ-साफ दिखने लगा है।
पिछले वर्षों की तुलना में इस बार जून माह में काफी कम बारिश हुई है और आगे भी यही स्थिति बने रहने की आशंका है। इन विषम परिस्थितियों में किसानों को केवल धान की पारम्परिक खेती पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। बल्कि किसान वैकल्पिक फसलों की खेती पर ध्यान दें। कम पानी में तैयार होने वाली फसलें मड़ुआ, मक्का, अरहर और अन्य मोटे अनाज यानी मिलेट्स इस मौसम में किसानों के लिए बेहतर और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकते हैं। किसान इनकी खेती कर खरीफ सीजन का सदुपयोग कर सकते हैं और आय भी बाधित नहीं होगी।
अब तक रजौली में सबसे अधिक, गोविन्दपुर में सबसे कम वर्षा
जिला सांख्यिकी कार्यालय की वर्षापात शाखा द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चालू माह में जिले का सामान्य वर्षापात 134.6 मिमी होना चाहिए था, लेकिन इसके मुकाबले अब तक जिले के सभी प्रखंडों का मिला कर कुल योग 847.4 मिमी वर्षापात ही हुआ है। जिसका जिला औसत महज 60.5 मिमी है। यह सामान्य से काफी कम है यानी आधी बारिश भी नहीं हो सकी है, जबकि जून माह माह का अंत हो चुका है।
जिले के रजौली प्रखंड में अब तक सर्वाधिक 112.6 मिमी, मेसकौर में 96.4 मिमी, अकबरपुर में 93.8 मिमी, नारदीगंज में 79.8 मिमी, काशीचक में 70.2 मिमी, वारिसलीगंज में 65.1 मिमी, सिरदला में 51.0 मिमी, कौआकोल में 49.6 मिमी, नवादा में 48.9 मिमी, नरहट में 43.4 मिमी, हिसुआ में 41.6 मिमी, रोह में 38.9 मिमी, पकरीबरावां में 28.2 मिमी तथा गोविन्दपुर प्रखंड में सबसे कम 27.0 मिमी बारिश ही दर्ज की जा सकी है।
भईया जी की रिपोर्ट