नवादा : जिले में खेती किसानी का कार्य शुरू हो गया है। किसान अपने खेतों की जुताई से लेकर बिचड़ा डालने तथा अन्य खरीफ फसलों की बोआई शुरू कर दिए हैं। किसानों को अभी से ही कुछ-कुछ रासायनिक खाद की आवश्यकता पड़ने लगी है।
चैनपुरा एवं मकनपुर गांव के कुछ किसान बताते हैं कि धान के बिचड़ा डालने से पूर्व खेतों की तैयारी में तड़ी वाला खाद अर्थात डीएपी अथवा एनपीके डालने से नर्सरी काफी उत्तम कोटि का तैयार होता है। लेकिन जब जिस उर्वरक की आवश्यकता किसान को होती है, विस्कोमान में वह उर्वरक उपलब्ध नहीं होता है। जैसे अभी यूरिया तथा एनपीके की उपलब्धता विस्कोमान में है लेकिन डीएपी नहीं है। जबकि बाजार के लाइसेंसी दुकानदारों के पास डीएपी उपलब्ध है जो निर्धारित कीमत से अधिक राशि भुगतान पर मिलती है।
बता दें कि वारिसलीगंज प्रखण्ड के किसानों को खरीफ फसलों के लिए निर्धारित लक्ष्य धान के लिए 8631 हेक्टेयर, मक्का 97.10, दलहनी अनाज 273.25, तेलहन 34.60., मोटा अनाज 77.90 बोआई के साथ कुल 9113.85 हेक्टेयर भूमि पर आच्छादन का लक्ष्य निर्धारित है। जिसकी बोआई से लेकर तैयार होने तक डीएपी एवं यूरिया की आवश्यकता होती है।
किसानों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से धान और गेहूं के मौसम में उर्वरकों की कमी की समस्या बनी हुई है और इस बार भी इसकी शुरुआत बिचड़ा गिराने के समय से ही हो गई है।उधर सरकारी दुकानों पर धान के बीज की अनुपलब्धता भी किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
जिले के कई किसानों ने बताया कि अच्छी उपज देने वाली तथा देर से पकने वाली कुछ पारंपरिक किस्मों की बुआई रोहिणी नक्षत्र में कर ली गई है, लेकिन कम अवधि में तैयार होने वाली और नवीनतम हाइब्रिड किस्मों के धान बीज अब तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। परिणामस्वरूप किसानों को निजी दुकानों से महंगे दामों पर बीज खरीदना पड़ रहा है।
इस संबंध में पूछे जाने पर प्रखंड कृषि पदाधिकारी कपिलदेव प्रसाद ने बताया कि विभाग को डीएपी का आवंटन नहीं मिलने के कारण विस्कोमान में फिलहाल डीएपी उपलब्ध नहीं है। हालांकि गोदाम में एनपीके खाद मौजूद है। उन्होंने बताया कि अगले सप्ताह डीएपी का रैक आने की संभावना है, जिसके बाद किसानों को खाद उपलब्ध करा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि विस्कोमान में डीएपी नहीं है, लेकिन बाजार की दुकानों में इसकी उपलब्धता बनी हुई है।
भईया जी की रिपोर्ट