मुजफ्फरपुर के मुशहरी अंचल से जुड़े एक रिटायर्ड अफसर की जमीन के फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए यहां के पूर्व अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया है। दरअसल, यह मामला एक रिटयर्ड अफसर की पुश्तैनी जमीन के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिल-खारिज कराने से जुड़ा है। इस सिलसिले में पूर्व में निलंबित चल रहे मुशहरी के तत्कालीन सीओ महेंद्र कुमार शुक्ला और राजस्व अधिकारी करुण करण को अहियापुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बताया जाता है कि रिटायर्ड अफसर की 70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन का कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिल-खारिज किया गया। इसी मामले में लोजपा आर के बेलसंड विधायक अमित कुमार रानू समेत आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।

गिरफ्तारी के बाद दोनों अधिकारियों को सदर अस्पताल ले जाकर उनकी मेडिकल जांच कराई गई, जिसके बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जानकारी के अनुसार, मामले में जमीन के दस्तावेजों की प्रामाणिकता, राजस्व रिकॉर्ड में कथित बदलाव और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका जांच के दायरे में है। यह पूरा मामला अहियापुर थाना क्षेत्र के शहबाजपुर निवासी रिटायर्ड अफसर विजय कुमार की पुश्तैनी जमीन से संबंधित है। विजय कुमार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार में अवर सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया है कि उनके परिवार की 70 डिसमिल जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दूसरे लोगों के नाम दर्ज कराने की कोशिश की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन के स्वामित्व से जुड़े पुराने दस्तावेजों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर राजस्व रिकॉर्ड में नाम बदलवाने की प्रक्रिया अपनाई गई।
रिटायर्ड अफसर के अनुसार हाजीपुर के सेलमपुर कुचुनदास कोर्ट निवासी कृष्णनंदन पासवान ने जमीन का खरीदार होने का दावा किया था। शिकायतकर्ता विजय कुमार के मुताबिक संबंधित दस्तावेज संख्या की जांच में वह किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज मिला। इसी आधार पर जमीन से जुड़े दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए गए। इस जमीन विवाद में बेलसंड के विधायक अमित कुमार रानू, उनके भाई अभिनव कुमार, तत्कालीन अंचलाधिकारी महेंद्र कुमार शुक्ला, राजस्व अधिकारी करुण करण और अंचल से जुड़े कर्मचारियों समेत कुल आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई जिसके बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई हुई। शिकायतकर्ता ने जमीन से संबंधित दस्तावेजों और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में कथित मिलीभगत का आरोप लगाया है।
