नीतीश कुमार के काफी करीबी रहे वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने अब खुद को जेडीयू से पूरी तरह अलग कर लिया है। केसी त्यागी ने अपना इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए साफ किया कि वो जदयू की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं और आगे सदस्यता नहीं लेंगे। केसी त्यागी ने लिखा कि— ‘मेरे कुछ राजनीतिक साथी, समर्थक और वर्करों ने 22 मार्च को एक बैठक बुलाई है जिसके बाद मैं आगे का निर्णय लूंगा’। जदयू छोड़ते हुए श्री त्यागी ने यह भी कहा कि अब वह अपनी जदयू सदस्यता का नवीनीकरण नहीं करेंगे। उन्होंने खुद एक पत्र जारी कर अपने ताजा निर्णय की जानकारी दी है। केसी त्यागी जदयू से लंबे समय से दूरी बनाए हुए थे। पार्टी की तरफ से उनके बयानों को भी खास तबज्जो नहीं दिया जा रहा था। पिछले दिनों भी जदयू की तरफ से ये कहा गया था कि केसी त्यागी पार्टी से अलग हो गए हैं।
विवादों में घिर गए थे वरिष्ठ नेता केसी त्यागी
इन तमाम हालातों और बयानों के बाद भी केसी त्यागी ने आधिकारिक रुप से पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया था। लेकिन अब उन्होंने जेडीयू से उनकी सदस्यता समाप्त होने की जानकारी देते हुए कहा है कि उन्होंने इसका नवीनीकरण नहीं कराया है। जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन के पिछले दिनों दिए गए बयान से यह पहले ही साफ हो गया था कि जेडीयू का त्यागी से अब कोई संबंध नहीं है। पार्टी से उनकी विदाई हो चुकी है, लेकिन सभी को उनके बयान का इंतजार था। बता दें कि केसी त्यागी साल की शुरुआत में ही विवादों में घिर गए थे। तब उन्होंने आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ी को हटाने के फैसले का विरोध किया था। इसके अलावा, 2024 में फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत सरकार से अलग स्टैंड लिया था। इन विवादों के चलते उन्हें सितंबर 2024 में जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
जॉर्ज, शरद, नीतीश के काल में रहे महासचिव
विदित हो कि इस वर्ष जनवरी माह में विवादों में घिरने के बाद केसी त्यागी ने नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न दिए जाने की मांग की थी। इसे लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र भी लिखा था। बिहार के राजनीतिक गलियारों में इस कदम को डैमेज कंट्रोल के तौर पर देखा गया था। हालांकि पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा था कि भारत रत्न को लेकर त्यागी का बयान उनकी निजी राय है और इसका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि— ‘केसी त्यागी जी का अब जेडीयू के मामलों से ज्यादा संबंध नहीं है। वे पार्टी में हैं भी या नहीं, यह कार्यकर्ताओं को भी नहीं पता है’। जदयू 30 अक्टूबर 2003 को पहली बार अस्तित्व में आया था। उस वक्त जॉर्ज फर्नांडिज ने बतौर अध्यक्ष और केसी त्यागी ने पार्टी महासचिव के रूप में जदयू की कमान संभाली थी। तब से केसी त्यागी ने शरद यादव और नीतीश कुमार की अध्यक्षता में भी काम किया और जदयू के अहम नेता और वरिष्ठ प्रवक्ता तथा सलाहकार बने रहे। अब उनकी जदयू में सियासी पारी का अंत हो गया है।