बिहार की नदियों में जमा गाद अब सड़क निर्माण के काम आएगी। आज मंगलवार को नई दिल्ली में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के बीच हुए एक बैठक के बाद यह ऐलान किया गया। बिहार सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच इसको लेकर MOU पर हस्ताक्षर किये गए। इसके तहत राज्य की नदियों और जलस्रोतों से गाद निकालकर उससे मिलने वाली मिट्टी, बालू और अन्य उपयोगी सामग्री का इस्तेमाल नेशनल हाईवे के निर्माण में किया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बैठक से बाहर आकर कहा कि बिहार की कई नदियों में एक-दो नहीं, दस-दस मीटर तक गाद जमी है। ऐसे में नदी में जलप्रवाह कैसे होगा। लेकिन बिहार और भारत सरकार की इस नई पहले के बाद अब नदी की गाद बिहार के लिए संजीवनी बनने वाली है। इससे बिहार खुशहाल और समृद्ध भी होगा।
इस नई पहल को नदी संजीवनी और नदी पुनर्जीवन अभियान से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य बिहार की नदियों से गाद हटाकर उनकी जलधारण क्षमता और जल प्रवाह को बेहतर बनाना है। साथ ही ड्रेजिंग से निकलने वाली सामग्री का इस्तेमाल सड़क निर्माण में करके बड़ी मात्रा में राजस्व बचाना है। इससे एक तरफ बाढ़ की समस्या से निपटने में मदद मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ सड़क निर्माण के लिए जरूरी सामग्री भी उपलब्ध होगी। MOU पर हस्ताक्षर के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि नदी से गाद निकालने का काम केंद्र सरकार अपने खर्च पर कराएगी। इसके लिए बिहार सरकार से एक भी पैसा नहीं लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार सरकार कोई रॉयल्टी नहीं लेगी यानी केंद्र सरकार बिहार को कोई रॉयल्टी नहीं देगी।
गडकरी ने महाराष्ट्र के बुलढाणा मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि वहां गाद की सफाई से जुड़े कामों के अच्छे परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने विदर्भ क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि पानी की कमी किसानों के लिए बड़ी समस्या रही है। उनके क्षेत्र में करीब 1600 तालाब बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में भी नदियों की सफाई और जल प्रबंधन की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। गडकरी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की इस पहल की तारीफ करते हुए कहा कि दूसरे राज्य भी इस मॉडल को अपना सकते हैं। ड्रेजिंग से निकलने वाली मिट्टी, बालू और अन्य उपयोगी सामग्री को सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार को हर साल बाढ़ के कारण करीब 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। नदियों में लगातार गाद जमा होने से उनका तल ऊपर उठ रहा है और हाई फ्लड लेवल में बदलाव हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार ने पहली बार किसानों के खेतों से गाद हटाने के लिए नीति बनाकर सहायता राशि देने का प्रावधान किया है। राज्य में जलस्रोतों के पुनर्जीवन और गाद प्रबंधन को लेकर भी पहल की गई है।
