बिहार में बीते दिन सियासी समीकरणों पर ‘खून के रिश्तों’ को भारी पड़ता देखना काफी सुकूनदायक रहा। दरअसल, यहां केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान अचानक खगड़िया स्थित अलौली के अपने पैतृक गांव शहरबन्नी के दौरे पर पहुंचे। चिराग वहां अपने दिवंगत चाचा अर्जुन पासवान को श्रद्धांजलि देने गए थै। इस गमगीन माहौल में तब सबकी आंखें नम हो गईं जब चिराग का अपनी बड़ी ‘मां’ से मिलन हुआ। जैसे ही चिराग ने उनका पैर छुआ और अपनी बांहों में भरा, उनके आंसू निकल पड़े। इसके बाद चिराग ने अपने चाचा पशुपति पारस का भी आशीर्वाद लिया जिन्होंने उन्हें —’हमेशा खुश रहने को कहा’। इसके बाद चिराग ने अपने चाचा के बेटे और भाई प्रिंस राज के साथ भी गिले-शिकवे दूर किए।
शहरबन्नी पैतृक आवास पहुंचते ही चिराग पासवान सबसे पहले अपनी बड़ी मां राजकुमारी देवी के पास पहुंचे। जैसे ही चिराग ने उनके पैर छुए, बड़ी मां ने उन्हें गले से लगा लिया। काफी देर तक चिराग अपनी बड़ी मां के साथ रहे और उनका हाल-चाल पूछा। इसके बाद चिराग पासवान का सामना उनके चाचा पशुपति पारस से हुआ। अपने चाचा को देखते ही चिराग पासवान ने उनके पैर छू लिए और आशीर्वाद लिया। इस दौरान दोनों के बीच कुछ पल के लिए बातचीत भी हुई। लेकिन क्या बातें हुई, इसका पता नहीं चल सका है। सालों की राजनीतिक अदावत के बीच आज खास बात यह रही कि इस मुलाकात के दौरान चिराग और पशुपति पारस के बीच कोई कड़वाहट नहीं दिखी।
बताया जाता है कि पशुपति पारस और चिराग पासवान के बीच करीब 5 मिनट तक एकांत में बातचीत हुई। दोनों के चेहरे के भाव बता रहे थे कि रिश्तों की बर्फ पिघलनी शुरू हो चुकी है। पारिवारिक एकजुटता का सिलसिला यहीं नहीं थमा और चाचा पारस के बाद चिराग पासवान ने अपने छोटे भाई और पूर्व सांसद प्रिंस राज से भी मुलाकात की। दोनों भाई एक-दूसरे के गले लगे और काफी देर तक साथ दिखे। इस दौरान वहां मौजूद लोजपा के दोनों धड़ों के समर्थकों का जोश सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने चिराग-प्रिंस के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। इस मौके पर चिराग ने अपने बड़ों का जिस तरह सम्मान किया और भाइयों के साथ एकजुटता दिखाई, उससे संकेत मिल रहे हैं कि रामविलास पासवान का कुनबा फिर से एक होने की दिशा में चल पड़ा है।