बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार के पहले कैबिनेट विस्तार की रूपरेखा तय हो गई है। सबकुछ फाइनल है और इस संभावित कैबिनेट लिस्ट पर केवल भाजपा आलाकमान की सहमति बाकी है। इसके लिए आश शनिवार की शाम मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी दिल्ली जा रहे हैं जहां वे गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर कैबिनेट विस्तार पर अंतिम सहमति लेंगे। इसके बाद वहां से सहमति मिलते ही कैबिनेट विस्तार के तारीख की घोषणा कर दी जाएगी। आज शनिवार को इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व सीएम और जदयू के सर्वेसर्वा नीतीश कुमार से मुलाकात की थी। समझा जाता है कि इसी मुलाकात में नए मंत्रियों के नाम तय किये गए। सूत्रों के अनुसार नए बनाए जाने वाले मंत्रियों में भाजपा के 7 और जदयू के 3 नाम सामने आए हैं। बिहार में सबकुछ तय होने के बाद अब मुख्यमंत्री आज शाम दिल्ली रवाना हो जायेंगे। माना जा रहा है कि दिल्ली में होने वाली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सम्राट चौधरी की मुलाकात में ही नए मंत्रियों के नामों पर अंतिम मुहर लगेगी।
बीजेपी में इन नामों पर चर्चा
सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल विस्तार 7 मई के आसपास हो सकता है जिसके बाद सम्राट सरकार अपनी पूरी टीम के साथ काम करने लगेगी। सूत्रों ने यह भी बताया कि इस बार मंत्रिमंडल विस्तार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। भाजपा पहली बार बिहार में मुख्यमंत्री पद पर है, ऐसे में पार्टी की कोशिश होगी कि राज्य के सभी प्रमुख जातीय समूहों और क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व मिले। इसी रणनीति के तहत कई नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना है। वहीं प्रशासनिक अनुभव को मजबूत करने के लिए कुछ अनुभवी नेताओं को भी स्थान दिया जा सकता है। BJP की ओर से जिन नेताओं के नामों पर चर्चा चल रही है, उनमें दिलीप जायसवाल, मंगल पांडे, राम कृपाल यादव, संजय जायसवाल, नीतीश मिश्रा, जनक राम और नीरज कुमार बबलू प्रमुख हैं। इसके अलावा संगठन से जुड़े कुछ नए चेहरों को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है, ताकि सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। चर्चा यह भी है कि किसी महिला नेता या युवा चेहरे को मौका देकर सरकार एक सकारात्मक और नया राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर सकती है।
JDU में इन नामों पर मंथन
JDU की ओर से भी संभावित मंत्रियों के नामों को लेकर मंथन जारी है। माना जा रहा है कि पार्टी अनुभव और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए अशोक चौधरी, लेसी सिंह और श्रवण कुमार जैसे नेताओं को मंत्रिमंडल में बनाए रख सकती है। साथ ही कुछ नए चेहरों को भी अवसर दिया जा सकता है, ताकि आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को और मजबूत किया जा सके। इसके अलावा कैबिनेट विस्तार में सहयोगी दलों की हिस्सेदारी भी अहम मानी जा रही है. लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की ओर से संजय सिंह का नाम प्रमुख रूप से चर्चा में है। जबकि हम पार्टी की तरफ से संतोष कुमार सुमन का नाम लगभग तय माना जा रहा है। एनडीए गठबंधन की मजबूती और संतुलन बनाए रखने के लिए सभी सहयोगी दलों को उचित प्रतिनिधित्व देना आवश्यक माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नई सरकार के अगले एजेंडे का संकेत भी देगा। खास तौर पर कानून‑व्यवस्था, रोजगार, उद्योग और ग्रामीण विकास जैसे अहम विभागों में नई प्राथमिकताएं तय की जा सकती हैं।