नई दिल्ली में कल 12 सितंबर शनिवार से शुरू हो रहे BRICS सम्मेलन में विदेशी मेहमानों को बिहार के खास जायके का स्वाद भी चखने को मिलेगा। दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इस दो दिवसीय अंतराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में बिहार के सत्तू और मखाना को भी स्थान मिला है। विश्व भर से आए मेहमानों के वेलकम कीट में बिहार के स्वाद को शामिल करने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया है और कहा है कि इससे नए बिहार की नई पहचान दुनिया के सामने आएगी। अपने सोशल मीडिया हैंडल पर मुख्यमंत्री ने लिखा कि पीएम की वेलकम किट में बिहार के सत्तू और मखाना को शामिल किया जाना बिहार के लिए गौरव का क्षण है। बिहार के इन दोनों उत्पादों के वैश्विक मंच पर पहुंचने से गदगद सीएम सम्राट चौधरी ने लिखा—’नए बिहार की नई पहचान,बिहार का स्वाद अब दुनिया के सामने।’

मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्तू और मखाना बिहार के स्वाद, परंपरा और उद्यमिता की पहचान हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि लोकल टू ग्लोबल के संकल्प को इससे मजबूती मिली है। दिल्ली में कल से ब्रिक्स सम्मेलन शुरू हो रहा है। BRICS सम्मेलन में आने वाले विदेशी मेहमानों को भारतीय खानपान की विविधता से रूबरू कराने की पूरी तैयारी की गई है। मेन्यू में भारत के अलग-अलग हिस्सों के पारंपरिक और लोकप्रिय व्यंजनों को शामिल किया गया है। इसमें मेहमानों को एक ही मेज पर रागी का डोसा, बाजरे का उपमा, कश्मीरी पुलाव, हैदराबादी बिरयानी और लखनवी कबाब जैसे व्यंजन नजर आएंगे। इसके साथ ही बाजरा उपमा, अवधी कबाब, हैदराबादी बिरयानी और किनुआ बिरयानी जैसे व्यंजन भी मेहमानों को परोसे जाने की जानकारी सामने आई है।
BRICS सम्मेलन के जरिए विदेशी मेहमानों को एक ही जगह पर भारत के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों के स्वाद का अनुभव मिलेगा। वेलकम किट में सत्तू और मखाना को जगह मिलना बिहार के लिए खास महत्व रखता है। सत्तू लंबे समय से बिहार के पारंपरिक खानपान का हिस्सा रहा है, जबकि मखाना अब देश-दुनिया में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। खासकर मिथिलांचल का मखाना बिहार की कृषि और स्थानीय उद्यमिता की महत्वपूर्ण पहचान बन चुका है। इसके बढ़ते बाजार के बीच अंतरराष्ट्रीय मेहमानों तक बिहार के इस उत्पाद की पहुंच राज्य के लिए नए अवसरों का संकेत भी मानी जा रही है।BRICS जैसे वैश्विक मंच पर बिहार के सत्तू और मखाना की मौजूदगी को ‘लोकल टू ग्लोबल’ की सोच से जोड़कर देखा जा रहा है। स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की कोशिशों के बीच बिहार के पारंपरिक स्वाद को दुनिया के प्रभावशाली प्रतिनिधियों तक पहुंचाने का यह अहम अवसर है।
