Patna : राजधानी पटना के ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा की राह अब बेहद आसान होने जा रही है। जिला प्रशासन ने एक बड़ी और महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिले के सात ग्रामीण प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेजों की स्थापना को हरी झंडी दे दी है। जिससे हजारों छात्रों को अपने घर के आसपास ही स्नातक स्तर की पढ़ाई का अवसर मिल सकेगा। आगामी 1 जुलाई से इन सभी कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने की तैयारी युद्ध स्तर पर की जा रही है, जिससे हजारों छात्रों को अपने घर के पास ही स्नातक (Graduation) की पढ़ाई करने का सुनहरा अवसर मिलेगा।
जिला प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार अथमलगोला, बेलछी, दनियावां, घोसवरी, खुशरूपुर, मनेर और संपतचक प्रखंडों में आगामी 1 जुलाई से शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों की माने तो इन कॉलेजों का संचालन अस्थायी भवनों से किया जाएगा। और उपयुक्त भवनों का चयन भी लगभग पूरा कर लिया गया है। चयनित परिसरों में छात्रों की सुविधा के लिए आवश्यक संसाधन आधुनिक जैसे – फर्नीचर, कंप्यूटर लैब, इंटरनेट एवं वाईफाई सुविधा, स्वच्छ पेयजल, आरओ सिस्टम तथा साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था की जा रही है।
वहीँ, प्रशासन की योजना हर कॉलेज के लिए एक भव्य और स्थायी कैंपस विकसित करने की है। इसके लिए भूमि चयन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। नियमों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में कॉलेज निर्माण के लिए कम से कम 5 एकड़ और शहरी क्षेत्रों में ढाई एकड़ भूमि की आवश्यकता तय की गई है। पटना के जिलाधिकारी (DM) डॉ. त्यागराजन एसएम ने अधिकारियों को हर हाल में 30 जून तक जमीन चयन का काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इस महत्वाकांक्षी योजना की समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं का जिक्र करते हुए कहा कि दूरी और सुरक्षित परिवहन की कमी के कारण कई बार ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां आगे की पढ़ाई नहीं कर पाती थीं। अब घर के पास कॉलेज खुलने से छात्राओं का ड्रॉप-आउट रेट (पढ़ाई छोड़ना) काफी कम होगा। इसके साथ ही, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शहरों में रहने, किराया देने और आने-जाने के भारी खर्च से बड़ी राहत मिलेगी।
योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए 1 जुलाई से नियमित कक्षाएं शुरू करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त निगरानी प्रणाली बनाई है। उप विकास आयुक्त (DDC) शुभम कुमार को इसकी नियमित समीक्षा की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि संबंधित अनुमंडल पदाधिकारियों (SDO) को जमीनी स्तर पर रोज की प्रगति पर नजर रखने को कहा गया है। प्रशासन का दावा है कि सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएंगी, जो पटना के ग्रामीण अंचल के युवाओं के भविष्य के लिए एक मील का पत्थर साबित होंगी।