पटना : राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ऐतिहासिक बेतिया राज की संपत्तियों के सुव्यवस्थित प्रबंधन, संरक्षण और उपयोग के लिए “बेतिया राज की संपत्तियों को निहित करने वाली नियमावली, 2026” का प्रारूप तैयार किया है। यह नियमावली “बेतिया राज संपत्ति अधिनियम, 2024” के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बनाई गई है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि राज्य के भीतर और बाहर स्थित बेतिया राज की सभी चल-अचल संपत्तियों को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत बिहार सरकार के नियंत्रण में लाया जाएगा, ताकि उनका संरक्षण और जनहित में उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
नियमावली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत प्रावधान किए गए हैं। अधिसूचना जारी होने के बाद संपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी और इच्छुक पक्षकारों को 60 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज करने का मौका मिलेगा। इन आपत्तियों के निपटारे के लिए जिला स्तर पर विशेष पदाधिकारी नियुक्त होंगे, जिन्हें सिविल न्यायालय जैसी शक्तियाँ प्राप्त होंगी और वे 90 दिनों के भीतर मामलों का निष्पादन करेंगे। यदि निर्धारित समय में कोई आपत्ति नहीं आती है या खारिज हो जाती है, तो समाहर्ता संबंधित संपत्तियों पर प्रभावी कब्जा लेंगे। इसके बाद संपत्तियों का वर्गीकरण किया जाएगा, जिसमें ऐतिहासिक विरासत संपत्तियाँ, सरकारी कब्जे वाली संपत्तियाँ, वैध पट्टाधारकों के कब्जे वाली संपत्तियाँ तथा बिना दस्तावेज वाले कब्जे शामिल होंगे।
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 01 जनवरी 1986 को कट-ऑफ तिथि मानते हुए 40 वर्ष से अधिक समय से कब्जे में रह रहे वैध अधिभोगियों को राहत दी जाएगी। ऐसे लोगों को निर्धारित राशि जमा कर संपत्ति को पूर्ण स्वामित्व में बदलने का अवसर मिलेगा। वहीं 01 जनवरी 1986 के बाद कब्जा करने वाले अतिक्रमणकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उनके भवनों को कमांडियर किया जा सकेगा और बिना वैध दस्तावेज वाले मामलों में बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1956 के तहत बेदखली की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि बेतिया राज की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व की संपत्तियों के संरक्षण के लिए विशेषज्ञों और पुरातात्विक संस्थानों की सहायता ली जाएगी, ताकि उनकी विरासत सुरक्षित रह सके। इस नियमावली के जरिए सरकार का उद्देश्य संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना, भू-माफियाओं पर रोक लगाना और इन बहुमूल्य संपत्तियों का जनहित व विकास कार्यों में प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।