नवादा : सपने पूरे करने के लिए हौसले के साथ-साथ कई बार बड़े फैसले लेने की भी जरूरत होती है। जिले के सिरदला प्रखंड क्षेत्र कुशाहन गांव के रहने वाले संतोष कुमार शाही ने देश को करीब से जानने के लिए ऐसा ही फैसला लिया। किसान परिवार से आने वाले संतोष ने नौकरी छोड़कर भारत भ्रमण को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। वह भी शादी होने के बाद, जब आम लोग घर-परिवार की जिम्मेवारियों में उलझ जाते हैं। इस तरह वह अब तक देश के 22 राज्यों और छह केंद्रशासित प्रदेशों की यात्रा कर चुके हैं। उनका लक्ष्य पूरे भारत को देखने के बाद विदेश यात्रा पर निकलना है।
जिला मुख्यालय से करीब 38 किलोमीटर दूर सिरदला प्रखंड क्षेत्र के कुशाहन गांव के संतोष को बचपन से ही अलग-अलग जगहों की संस्कृति, खानपान, रहन-सहन और जीवनशैली जानने की ललक रही है। नौकरी के दौरान बार-बार छुट्टी लेने में होने वाली परेशानी उनके घूमने के जुनून में बाधा बनने लगी। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया और देश को करीब से देखने के लिए यात्रा पर निकल पड़े। बचत खत्म हुई तो पैदल चलने लगे। नौकरी छोड़ने के बाद यात्रा के दौरान धीरे-धीरे उनकी जमा पूंजी खत्म होने लगी। आर्थिक तंगी के कारण बाइक से सफर जारी रखना मुश्किल हो गया, बावजूद संतोष ने हार नहीं मानी। उन्होंने लिफ्ट लेकर और पैदल चलकर यात्रा जारी रखी। उत्तराखंड और पंजाब के अलग-अलग इलाकों में उन्होंने 42 दिनों तक इसी तरह सफर किया।
संतोष अपनी यात्रा के दौरान बैकपैक में टेंट और खाना बनाने के लिए कैंपिंग स्टोव रखते हैं। रात में कभी टेंट लगाकर, तो कभी मंदिरों और गुरुद्वारों में ठहरते हैं। लंबी दूरी तय करने वाले ट्रकों से भी लिफ्ट लेकर आगे का सफर पूरा करते हैं। इस तरह सीमित संसाधनों के बीच वह अपने घूमने के जुनून को जिंदा रखे हुए हैं। संतोष का कहना है कि यात्रा ने उन्हें लोगों पर भरोसा करना और देश को नए नजरिये से देखना सिखाया है। दक्षिण भारत में तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम बोलने वाले लोगों के बीच भी उन्हें भाषा की वजह से अपना सफर रोकना नहीं पड़ा। उनके मुताबिक, भावनाएं व्यक्त करने के लिए हमेशा शब्दों की जरूरत नहीं होती। इंसानियत और आपसी समझ से भी लोगों के बीच जुड़ाव बन सकता है।
संतोष के फैसले को परिवार और समाज के कुछ लोगों ने समय और पैसे की बर्बादी बताया, लेकिन वे अपने संकल्प पर कायम रहे। अब उन्हें भारत के बाकी छह राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों की यात्रा पूरी करनी है। संतोष कहते हैं, “मेरा प्रण था कि जब तक भारत के हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश को देख नहीं लूंगा, विदेशी धरती पर कदम नहीं रखूंगा” यात्रा के दौरान संतोष प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हैं। उनका मानना है कि आने वाली पीढ़ी को सुंदर और सुरक्षित प्रकृति सौंपना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। देश के अलग-अलग हिस्सों को करीब से देखने के साथ वे लोगों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनने का संदेश देना चाहते हैं।
भईया जी की रिपोर्ट
