नवादा : जिले में पारिवारिक जमीन विवाद और आपसी बंटवारे से जुड़े सिविल प्रकृति के मामले को आपराधिक रंग देकर अदालत में लाने के मामले में व्यवहार न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। जेएमएफसी आकांक्षा आनंद की अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान परिवाद पत्र और उपलब्ध रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद इसे खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि संपत्ति के अधिकार और मौखिक बंटवारे से जुड़े विवाद का समाधान दीवानी अदालत ही किया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला
मिली जानकारी के अनुसार, अर्जुन पासवान ने विरेन्द्र कुमार के खिलाफ कोर्ट में आपराधिक मामला सीपी-1017/26 दर्ज कराया था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसके पूर्वजों के बीच मौखिक बंटवारा हुआ था, जिसके तहत एक जमीन उसके हिस्से में आयी थी। आरोप लगाया गया कि विरोधी पक्ष ने मौखिक बंटवारे की शर्तों का उल्लंघन करते हुए जालसाजी के माध्यम से पैतृक जमीन को बेचने या ठिकाने लगाने का प्रयास किया।
कोर्ट ने माना पारिवारिक संपत्ति का विवाद
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायत पत्र और रिकॉर्ड का अवलोकन किया। इसमें पाया गया कि दोनों पक्ष एक ही वंश वृक्ष और परिवार से जुड़े हैं। पूरा विवाद मौखिक बंटवारे के अस्तित्व और उसमें दोनों पक्षों के हिस्से को लेकर था। अदालत ने माना कि मौखिक बंटवारा हुआ था या नहीं और संपत्ति में किसका कितना अधिकार है, इसका निर्धारण आपराधिक अदालत के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। इस तरह के विवाद के समाधान के लिए दीवानी न्यायालय का रास्ता अपनाया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
जेएमएफसी आकांक्षा आनंद ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। आदेश में ‘नरेश कुमार बनाम कर्नाटक राज्य’ और वर्ष 2020 के ‘गोविंद प्रसाद केजरीवाल बनाम बिहार राज्य’ मामले का उल्लेख किया गया है। अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट को इस तरह के मामलों में सतर्क रहना चाहिए, ताकि दीवानी विवाद को आपराधिक रंग देकर कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग न किया जा सके। अदालत ने माना कि संबंधित मामला सिविल प्रकृति का है। संपत्ति को लेकर यदि किसी पक्ष को कोई शिकायत या अधिकार संबंधी विवाद है, तो उसका समाधान दीवानी मुकदमे के माध्यम से किया जा सकता है।
बीएनएसएस की धारा 226 के तहत खारिज हुआ मामला
अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 226 के तहत परिवाद को खारिज कर दिया। साथ ही कोर्ट के प्रभारी को मामले से जुड़े तमाम रिकॉर्ड को रिकॉर्ड रूम में कंसाइन करने का निर्देश दिया।
अदालत के आदेश से स्पष्ट किया गया कि संपत्ति के स्वामित्व, हिस्सेदारी और पारिवारिक बंटवारे से जुड़े विवादों को आपराधिक मुकदमे का रूप देकर समाधान नहीं किया जा सकता। ऐसे विवादों के लिए संबंधित पक्षों को दीवानी न्यायालय की प्रक्रिया अपनानी होगी।
भईया जी की रिपोर्ट