नवादा : नगर थाना क्षेत्र में ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें बदमाशों ने पुलिस की पहचान और अपराध के भय को ही अपना हथियार बना लिया। बाइक पर सवार रेनकोट पहने दो युवकों ने पहले खुद को पुलिस विभाग का आदमी बताया और बुजुर्ग को भरोसे में लेने के लिए आई-कार्ड भी दिखाया। इसके बाद आगे हत्या की वारदात होने की बात कहकर बुजुर्ग को इस कदर भयभीत किया कि उन्होंने अपने शरीर पर पहने सोने के आभूषण तक उतारकर बदमाशों के हाथ में दे दिये। कागज में लपेटकर सुरक्षित रखने का झांसा देकर बदमाश करीब 3.50 लाख रुपये मूल्य के सोने के आभूषण लेकर फरार हो गया।

घटना नगर थाना क्षेत्र के बिजली ऑफिस के समीप की बतायी गयी है। पंचमुखी हनुमान नगर निवासी बुजुर्ग विजय कुमार शाह अपने घर से नेमदारगंज थाना क्षेत्र के फरहा स्थित अपनी दुकान के लिए जा रहे थे। इसी दौरान बाइक पर सवार दो लोग उनके पास पहुंचे। दोनों ने रेनकोट पहन रखा था। युवकों ने स्वयं को पुलिस विभाग से जुड़ा बताया और बुजुर्ग को विश्वास में लेने के लिए आई-कार्ड दिखाया।
बताया जाता है कि विजय कुमार शाह आई-कार्ड को ठीक से देख भी नहीं पाये थे कि बाइक पर पीछे बैठे युवक ने उन्हें रोकते हुए कहा कि आगे हत्या की घटना हुई है और आप दिनदहाड़े सोने की चेन व अंगूठी पहनकर घूम रहे हैं। युवक ने सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा कि आभूषण इस तरह पहनकर नहीं चलें और उन्हें कागज में लपेटकर डिक्की में रख लें।
पुलिस का हवाला और हत्या की बात सुनकर बुजुर्ग घबरा गये। उन्होंने अपने गले से सोने की चेन और उंगली से सोने की अंगूठी उतार दी। सामने मौजूद युवक ने दोनों आभूषण कागज में रख लिये। इसके बाद वह कागज को मोड़कर सुरक्षित रखने के बहाने बाइक की डिक्की की ओर बढ़ा। इसी दौरान बदमाशों ने कथित तौर पर ऐसा चकमा दिया कि बुजुर्ग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही दोनों बाइक से सद्भावना चौक की ओर तेजी से फरार हो गये। जब तक पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ, तब तक बदमाश उनकी नजरों से ओझल हो चुके थे। पीड़ित के अनुसार, ठगे गये सोने के आभूषणों की कुल कीमत करीब 3.50 लाख रुपये है।

घटना के बाद विजय कुमार शाह नगर थाना पहुंचे और पुलिस को पूरे मामले की जानकारी देते हुए आवेदन दिया। शिकायत मिलने के बाद नगर थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस घटना के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज, बदमाशों के हुलिये, बाइक और उनके आने-जाने के रास्ते की पड़ताल कर रही है। पुलिस की जांच के बाद ही घटना में शामिल बदमाशों की पहचान और पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
शहर और जिले में ठगी के मामलों में बदमाशों द्वारा विश्वास को हथियार बनाकर अपराध करने का तरीका लगातार सामने आता रहा है। कभी रिश्तेदार बनकर तो कभी शुभचिंतक बनकर लोगों को झांसे में लेने के बाद अब पुलिसकर्मी बनकर भय पैदा करने का यह तरीका सामने आया है। घटना में बदमाशों ने पहले ‘पुलिस’ की पहचान का भरोसा, फिर ‘मर्डर’ का डर और अंत में ‘सुरक्षा’ का बहाना इस्तेमाल किया। यानी कुछ ही मिनटों में भरोसा, भय और लालच नहीं बल्कि सुरक्षा की मनोवैज्ञानिक चाल के जरिए बुजुर्ग से उसके कीमती आभूषण उतरवा लिये गये। ऐसे मामलों में पुलिस का नाम और पहचान-पत्र दिखाये जाने मात्र से किसी व्यक्ति पर भरोसा करने के बजाय संबंधित पुलिसकर्मी की पहचान की तत्काल पुष्टि करना और कीमती सामान किसी अनजान व्यक्ति के हाथ में नहीं देना बेहद जरूरी है।

भईया जी की रिपोर्ट
