-मानिटरिंग करने वाले को पता नहीं अबतक दर्ज हुये कितने मामले
नवादा : राज्य सरकार ने बड़े तामझाम के साथ सहयोग पोर्टल आम लोगों के लिए लागू किया। उद्देश्य था नागरिकों की समस्या का समय सीमा के अंदर समाधान। यहां तक प्रगति की जानकारी उपलब्ध करना। और तो और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई सुनिश्चित करना। इसकी मानिटरिंग की जिम्मेदारी राज्य मुख्यालय को दी गयी है।अब सबसे बड़ा सवाल राज्य मुख्यालय मानिंटरिंग कर रहा है?
जिले के बहुचर्चित आरटीआई कार्यकर्ता प्रणव कुमार चर्चिल ने जब सूचना के अधिकार के तहत जानना चाहा कि राज्य में अबतक सहयोग पोर्टल पर कितने मामले दर्ज हुए? दर्ज मामले में कितने पर कार्रवाई हुई? अगर नहीं तो कितने अधिकारियों पर कार्रवाई हुई? अब आप गौर फरमाएं मुख्य सचिव ने राज्य के सभी आयुक्तों के साथ डीएम से जबाव मांगा है कि आपके किस प्रमंडल व किस जिले में अबतक सहयोग पोर्टल पर कितने मामले दर्ज हुए और कितने का समाधान हुआ? अगर नहीं तो कितने अधिकारियों पर कार्रवाई हुई?
और तो और सहयोग पोर्टल पर जिला स्तर से समाधान नहीं होने पर आवेदक को सरकारी खर्च पर राज्य मुख्यालय भेजना है। लेकिन ऐसा किसी जिले में हो नहीं रहा है। ऐसे में आरटीआई कार्यकर्ता ने यह जानना चाहा है कि कितने मामले में आवेदक को सरकारी खर्च पर राज्य मुख्यालय भेजा गया? अब सबसे बड़ा सवाल जब मानिटरिंग राज्य मुख्यालय को करना है तो आयुक्त व डीएम से संख्या से संबंधित जबाब मांगना कहां तक न्यायोचित है? अगर नहीं तो फिर सहयोग पोर्टल को जनता के साथ धोखा क्यों नहीं माना जाय?
भईया जी की रिपोर्ट