नवादा : जिले में 10 साल पुराने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में पीड़िता को आखिरकार न्याय मिला। आरोपी विकास कुमार को 14 साल सश्रम कारावास और 6 लाख रुपये मुआवजे की अनुशंसा की गई है।कौआकोल थाना कांड संख्या 158/16 में सुनवाई पूरी करते हुए विशेष न्यायालय पॉक्सो सदर कोर्ट के एडीजे-छह की अदालत ने अभियुक्त विकास कुमार उर्फ विकास यादव को दोषी करार देते हुए 14 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनायी। अदालत ने दोषी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर उसे छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
जानकारी के अनुसार, अदालत ने मामले में पीड़िता को छह लाख रुपये मुआवजा दिये जाने की अनुशंसा जिला विधिक सेवा प्राधिकार से की है। लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ित परिवार के लिए अदालत का यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 24 दिसंबर 2016 की शाम की है। उस समय 14 वर्षीय नाबालिग लड़की अपने घर के पास बैठी हुई थी, इसी दौरान लालपुर गांव निवासी विकास कुमार उर्फ विकास यादव वहां पहुंचा। आरोप है कि उसने किसी काम का बहाना बनाकर नाबालिग को अपने घर के अंदर चलने के लिए कहा।
बताया गया कि नाबालिग उसके झांसे में आकर घर के अंदर चली गयी। इसके बाद आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के दौरान नाबालिग द्वारा शोर मचाये जाने पर आरोपी वहां से फरार हो गया। घटना की जानकारी परिजनों को मिलने के बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गयी। इसके बाद कौआकोल थाना कांड संख्या 158/16 दर्ज कर पुलिस ने घटना से जुड़े साक्ष्य एकत्र किये और गवाहों के बयान दर्ज किये। अनुसंधान पूरा होने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित किया। इसके बाद मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो अदालत में शुरू हुई।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक भोला पासवान ने अदालत के समक्ष मामले से जुड़े साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किये। अभियोजन पक्ष ने पुलिस अनुसंधान, गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ लगाये गये आरोपों को साबित करने का पक्ष रखा।
पुलिस द्वारा प्रस्तुत किये गये साक्ष्य, गवाही और न्यायालय में समर्पित चार्जशीट समेत मामले में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने विकास कुमार उर्फ विकास यादव को दोषी पाया। इसके बाद अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2) के तहत उसे 14 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा के साथ ही 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड की राशि अदा नहीं करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतने का आदेश दिया।
जानकारी के अनुसार, अदालत ने मामले में पीड़िता को राहत देते हुए छह लाख रुपये मुआवजा दिये जाने की अनुशंसा जिला विधिक सेवा प्राधिकार से की है। इससे पीड़िता को आर्थिक सहायता मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
भईया जी की रिपोर्ट