नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बिहार में जारी अलर्ट के बीच फिलहाल बड़ा खतरा टल गया है। हालांकि अभी उत्तर बिहार में अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील माने जा रहे हैं। इसे देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। वहीं बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के लिए आज गुरुवार की सुबह खुद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने गंडक बराज का हवाई सर्वेक्षण किया। खबर है कि आज सुबह गंडक बराज का जलस्तर कुछ बढ़ा है, जिसके बाद संबंधित जिलों के प्रशासन को अभी अलर्ट मोड में रहने को कहा गया है।
घटने के बाद फिर बढ़ा गंडक का जलस्तर
वाल्मीकिनगर गंडक बराज से आज सुबह करीब आठ बजे 93 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। पश्चिम चंपारण में प्रवेश करने के बाद गंडक नदी का पानी अन्य जिलों से होते हुए वैशाली और सारण की सीमा के पास सोनपुर के समीप गंगा नदी में मिलता है। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, रात 12 बजे वाल्मीकिनगर बराज से 1,50,200 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा था। इसके बाद इसमें लगातार कमी आई। रात तीन बजे यह 88,300 क्यूसेक, सुबह चार बजे 81,400 क्यूसेक और 4:30 बजे 79,700 क्यूसेक पर पहुंच गया। इसके बाद सुबह 5:30 बजे से डिस्चार्ज में फिर वृद्धि दर्ज की गई। छह बजे 88,300 क्यूसेक, सात बजे 92,900 क्यूसेक और सुबह आठ बजे तक 93,000 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया।
इधर गंडक के जलग्रहण क्षेत्र का हवाई सर्वे करने के बाद मीडिया से कहा कि भगवान का शुक्र है कि फिलहाल संकट टलता दिख रहा है। लेकिन अभी हम सभी को अलर्ट रहने की जरूरत है। इसबीच मुजफ्फरपुर से खबर है कि यहां भी गंडक नदी के जलस्तर में गिरावट देखी गई है। रेवा घाट पर गंडक नदी का खतरे के निशान से करीब एक मीटर नीचे है। आपदा प्रबंधन विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है। विभिन्न जिलों के गंडक क्षेत्र के प्रखंडों में लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। संवेदनशील तटबंधों पर 24 घंटे निगरानी के साथ रात में पेट्रोलिंग की व्यवस्था भी की गई है। गंडक से प्रभावित होने वाले साहेबगंज, पारू और सरैया प्रखंडों में प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। संबंधित पंचायतों में माइकिंग कर लोगों को अलर्ट रहने की अपील की जा रही है।