नवादा : जिले में संचालित मनरेगा योजना में हद है रे भैया! का तो बोलो नै लेकिन राशि जरुर निकल जा है। खासकर रजौली के तो कहना की है। जंगली-पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण कोई पदाधिकारी निरीक्षण तक नहीं करते और कागज पर सब कुछ ठीक हो जाता है। होगा भी क्यों नहीं जब ही नहीं होना है। तभी तो कहा जाता है “चोर-चोर, मौसेरे भाय” तो यहां हम बात कर रहे हैं रजौली प्रखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत मुरहेना का। मनरेगा योजना से वित्तीय वर्ष 2025-2026 मे ग्राम हीरोडीह में नदी किनारे सरकारी जमीन पर तीन तालाब बनाया गया और तीनों तालाब में लगभग ₹6 लाख फर्जी तरीके से निकाल लिया गया। राशि की निकासी 5 माह पहले की गयी है।

योजना के अनुसार जहां तालाब खोदने की बात कही गई है उस जमीन पर धान का फसल लगा हुआ है और तालाब का कहीं नामो निशान नहीं है। तालाब खोदने का कार्य हुआ ही नहीं और राशि फर्जी मजदूरों के नाम पर गबन कर लिया गया। किए गए फर्जीवाड़ा की जांच एवं जांचोपरांत कार्रवाई हेतु जिला पदाधिकारी, लोकपाल मनरेगा, लेखा प्रशासन एवं स्वनियोजन डीआरडीए के साथ प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी रजौली को को दिया गया है बावजूद कार्रवाई तो दूर अबतक जांच तक आरंभ नहीं की गयी है। ऐसे में एकबार फिर वही सवाल! जांच भी होगी? या फिर कूड़ेदान में डाल दिया जाएगा?
भईया जी की रिपोर्ट
