विश्व मच्छर दिवस पर आज गुरुवार 20 अगस्त को पर्यावरण भारती द्वारा पौधारोपण हुआ। पौधारोपण का नेतृत्व पर्यावरण प्रहरी सौरभ कुमार गोलू ने किया। इस अवसर पर पर्यावरण भारती के संस्थापक, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के प्रांत संयोजक तथा अखिल भारतीय पेड़ उपक्रम टोली सदस्य राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा कि भारत में चिपको आंदोलन का शुभारंभ राजस्थान राज्य के जोधपुर की माता अमृता देवी ने किया था। पर्यावरणविद सुन्दरलाल बहुगुणा ने चिपको आंदोलन को पुनः जीवित किया। जोधपुर के महाराजा अभय सिंह अपने महल बनवाने के लिए राजस्थान के देव वृक्ष ” खेजड़ी ” को काटने का आदेश दिया था। इस पर गुरू जंमेश्वर महाराज ने लोगों को कहा कि आप अपना बलिदान दे देना, परन्तु देव वृक्ष खेजड़ी काटने नहीं देना।
इस प्रसंग में माता अमृता देवी सर्वप्रथम खेजड़ी पेड़ से लिपट गईं एवं क्षण भर में महाराज अभय सिंह के सैनिकों ने उनकी गर्दन धड़ से अलग कर दिया। तब उनकी 3 पुत्रियों ने भी वृक्षों को बचाने के लिए बलिदान हुई। देखते ही देखते 71 महिलायें और 292 पुरूष, कुल 363 पर्यावरण प्रेमियों ने वृक्षों की रक्षा हेतु अपने प्राणों की आहुति दे दी। इसके बाद यह संकल्प लिया गया कि पृथ्वी पर प्रत्येक मानव के लिए 422 पेड़ अनिवार्य है। परन्तु स्वार्थी लोगों के कारण भारत में प्रति व्यक्ति मात्र 28 पेड़ ही बचा है। अतः वृक्षों की सुरक्षा हेतु हेतु चिपको आंदोलन प्रारंभ करना होगा। अन्यथा प्राकृतिक ऑक्सीजन के अभाव में मानव जीवन समाप्त हो जायेगा।
राम बिलास शाण्डिल्य ने बताया कि ब्रिटिश डॉक्टर सर रोनाल्ड राॅस ने 20 अगस्त 1897 ई में खोज किया था कि मानव में मलेरिया बुखार, मादा एनोफिलीस मच्छर के कटने से फैलता है। मच्छर केवल जीव नहीं बल्कि जानलेवा रोगों के वाहक है। इस ऐतिहासिक दिन के याद में विश्व स्वास्थ्य संगठन ( W.H.O.) द्वारा 20 अगस्त को प्रति वर्ष ” विश्व मच्छर दिवस ” मनाया जाता है। इसका उद्देश्य है– संसार के मानव को मच्छर से बचाव हेतु जागरूक करना। अपने घरों के कूलर, गमलों, पुराने टायरों, बाल्टियों में पानी इकट्ठा नहीं होने दें। घर के आसपास जल जमाव न हों। बर्तन ढँक कर रखें। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग अवश्य करें। पर्यावरण भारती के पौधारोपण कार्यक्रम में इन्द्रजीत कुमार, आदित्य कुमार, मदन मोहन प्रसाद, राम बिलास शाण्डिल्य, हिमालय, सौरभ कुमार गोलू, अक्षत राज इत्यादि ने भाग लिया।