पटना/मोकामा: पटना जिले के मोकामा प्रखंड में गंगा नदी का कटाव लगातार तेज होता जा रहा है। मोकामा घाट, पचमहला और औंटा क्षेत्र में गंगा के रौद्र रूप को देखकर स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले लगभग पांच दिनों में गंगा करीब 20 फीट जमीन अपने आगोश में ले चुकी है, जिससे कई गांवों पर खतरा मंडराने लगा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मोकामा घाट स्थित सीआरपीएफ फायरिंग रेंज तथा औंटा में नव-निर्मित प्राथमिक उपचार केंद्र की दूरी गंगा नदी से अब लगभग 45 मीटर रह गई है। यदि कटाव की यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले दिनों में इन परिसंपत्तियों पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। हाल ही में बिहार बाढ़ नियंत्रण समिति के अध्यक्ष, जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता, सहायक अभियंता सहित अन्य अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कटाव रोकने के लिए नदी किनारे स्लोप बनाकर सैंड बैग लगाने के निर्देश दिए थे।
ग्रामीणों का कहना है कि गत रविवार शाम गंगा में ड्रेजर मशीन से कार्य किया गया, जिसके बाद नदी की मुख्य धारा को कुछ समय के लिए किनारे से हटाकर बीच की ओर मोड़ा गया। इससे अस्थायी राहत मिली, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि यह स्थायी समाधान नहीं है। उनका कहना है कि इस मार्ग से बड़े जहाजों की नियमित आवाजाही होती है और जहाज गुजरने के दौरान उठने वाली तेज लहरें कटाव को और बढ़ा देती हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, मोकामा घाट से औंटा तक लगभग चार किलोमीटर के दायरे में पिछले कुछ दिनों में सैकड़ों एकड़ भूमि गंगा में समा चुकी है। सोमवार को भी कई स्थानों पर कटाव जारी रहा, जिससे आसपास के गांवों के लोगों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग ने सोमवार से सैंड बैग लगाकर बचाव कार्य शुरू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कार्य प्रारंभ नहीं हो सका। इस संबंध में विभाग के मुख्य अभियंता एजाज कलीम ने बताया कि सीआरपीएफ और विभागीय अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है तथा शीघ्र ही बचाव कार्य शुरू किया जाएगा।
उधर, मोकामा घाट से औंटा के बीच बसे कई गांवों के लोग बचाव कार्य शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो कटाव और तेज होने से कई गांवों तथा सरकारी परिसंपत्तियों को भारी नुकसान हो सकता है। लगातार बढ़ते कटाव के कारण पूरे क्षेत्र में भय का माहौल है। स्थानीय लोग सरकार और जल संसाधन विभाग से तत्काल स्थायी उपाय करने की मांग कर रहे हैं, ताकि गांवों, कृषि भूमि और सार्वजनिक संपत्तियों को सुरक्षित रखा जा सके।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट