पटना। बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने राज्य में लंबित करीब 3.10 लाख दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) आवेदनों को लेकर बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। उन्होंने आज यानि कि शुक्रवार को विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इन सभी लंबित आवेदनों का निष्पादन अधिकतम 15 दिनों के भीतर हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। इस कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री के इस कड़े रुख के बाद विभाग के सचिव जय सिंह ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हाल ही में राजस्व कर्मचारियों एवं अंचल अधिकारियों (CO) के सामूहिक अवकाश पर रहने के कारण बड़ी संख्या में आवेदन जांच के स्तर पर लंबित हो गए हैं। राज्य सरकार के सात निश्चय पार्ट-3 के तहत जीवन सुगमता के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इन मामलों का शीघ्र निपटारा बेहद आवश्यक माना गया है। उन्होंने दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। आम लोगों को मामूली तकनीकी त्रुटियों के नाम पर अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाए।
विभाग ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और कर्मचारियों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए एक नया और महत्वपूर्ण प्रावधान लागू किया है। राजस्व कर्मचारियों को अब आवेदनों की जांच सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ करनी होगी। मामूली या तकनीकी कारणों से आवेदनों को बेवजह वापस नहीं किया जा सकता। कोई त्रुटि मिलने पर उसे चिह्नित कर संबंधित अंचल अधिकारी (CO) द्वारा जांच की जाएगी। त्रुटि अनुचित या गलत मिलने पर आवेदन सीधे आवेदक को वापस नहीं बल्कि, संबंधित कर्मचारी को भेजकर आवेदन स्वीकार करने और आगे की प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया जाएगा।
विभाग के सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों में लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष अभियान चलाएं। इस अभियान की प्रगति की डेली मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी। सरकार ने इस पूरे कार्य को ‘सर्वोच्च प्राथमिकता’ की श्रेणी में रखा है, जिससे जमीन से जुड़े मामलों में आम जनता को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल सके।