पटना। बिहार में विधान परिषद की 10 सीटों (9 नियमित और 1 उपचुनाव) के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है। तारीखों के ऐलान के साथ ही सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह है कि एनडीए और महागठबंधन में कौन कितनी सीटों पर दांव लगाएगा? मौजूदा विधायक संख्या बल के हिसाब से एनडीए की 9 और महागठबंधन (आरजेडी) की 1 सीट पर जीत तय मानी जा रही है, जिससे वोटिंग की नौबत आने के आसार बेहद कम हैं। बिहार विधानसभा की मौजूदा स्थिति के अनुसार, विधान परिषद की एक सीट जीतने के लिए 25 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है।
सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सीटों का गणित लगभग सुलझ चुका है। इस फॉर्मूले के तहत जेडीयू 4 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है और बीजेपी अपने पास 4 सीटें रख सकती है। वहीँ, लोजपा (रामविलास) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को बीजेपी अपने कोटे से 1 सीट दे सकती है। जिन 10 सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें से फिलहाल 5 सीटें जेडीयू, 2 बीजेपी, 2 आरजेडी और 1 सीट कांग्रेस के पास है। नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर उपचुनाव होना है। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को साधने के लिए सभी दलों ने अपने-अपने पत्ते लगभग तय कर लिए हैं। रेस में इन नामों की चर्चा सबसे तेज है।
जेडीयू (JDU) से निशांत कुमार, ललन मंडल, राजीव कुमार सिंह, भीष्म साहनी हैं, निशांत कुमार (स्वास्थ्य मंत्री) का नाम फिक्स, गुलाम गौस और गुलाम रसूल बलियावी भी रेस में। बीजेपी (BJP) की बात की जाय तो संजय मयूख, प्रेम रंजन पटेल, सिद्धार्थ शंभू, राजेंद्र सिंह हैं। जिसमें संजय मयूख का नाम तय माना जा रहा है। अमृता भूषण और भीम साहू भी कतार में। वहीं, RLM (कुशवाहा) से वर्तमान सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश का नाम तय हैं, लोजपा (R) से चिराग पासवान के भांजे सीमांत मृणाल को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। आरजेडी (RJD) महागठबंधन की ओर से सुनील सिंह का कैंडिडेट बनना लगभग तय।
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा के समीकरण को देखें तो एनडीए 9 सीटों पर आसानी से जीत दर्ज कर रहा है, जबकि आरजेडी के खाते में 1 सीट जा रही है। यदि एनडीए 9 और आरजेडी केवल 1 सीट पर उम्मीदवार उतारती है, तो चुनाव पूरी तरह निर्विरोध संपन्न हो जाएगा और मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब सभी की निगाहें उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं।