जमुई। बिहार में सरकारी दफ्तरों की कार्यशैली और प्रशासनिक जवाबदेही पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा मामला जमुई जिले के बरहट प्रखंड कार्यालय का है, जहां बुधवार (20 मई) की दोपहर कार्यालय समय में प्रधान लिपिक राजेंद्र पासवान अपनी कुर्सी पर सोते हुए नजर आए। दोपहर करीब 1:06 बजे का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों और दूर-दूर से आए फरियादियों में भारी नाराजगी है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बरहट प्रखंड कार्यालय में रोजाना बड़ी संख्या में लोग विभिन्न सरकारी योजनाओं, पेंशन, राशन कार्ड और जरूरी प्रमाण पत्रों के लिए पहुंचते हैं। लेकिन, कर्मचारियों की लापरवाही और उदासीन रवैये के कारण लोगों घंटों इंतजार करना पड़ता है। छोटे-छोटे कामों और प्रमाण पत्रों के लिए उन्हें कई दिनों तक दफ्तर के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जिस वक्त प्रधान लिपिक आराम फरमा रहे थे, उस समय भी कई लोग अपने काम के सिलसिले में दफ्तर में मौजूद थे।
मामला तूल पकड़ने के बाद संबंधित प्रधान लिपिक राजेंद्र पासवान ने अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं रहती है और स्वास्थ्य कारणों की वजह से वे कुछ देर के लिए असहज महसूस कर रहे थे। वहीं, इस पूरे मामले पर बरहट के प्रखंड विकास पदाधिकारी श्रवण कुमार पांडेय ने बताया कि प्रधान लिपिक पूर्व में लकवा (पैरालिसिस) की बीमारी से पीड़ित रह चुके हैं, जिसके कारण उनकी शारीरिक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं रहती है। अत्यधिक गर्मी और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों की वजह से संभव है कि वे कुछ देर के लिए नींद में चले गए हों।
बीडीओ श्रवण कुमार पांडेय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा है कि इस पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। हालांकि, स्थानीय लोगों का मानना है कि यह घटना केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी विभागों में अनुशासन और लचर कार्य संस्कृति को दर्शाती है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक प्रखंड स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक समय से पहुंचना मुमकिन नहीं है। फिलहाल, इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।