नवादा : जिले में अप्रैल माह में ही पानी का स्तर 15 से 25 फीट तक गिर गया है, जिससे जल संकट गहराने लगा है। चापाकल निरर्थक साबित हो रहा है और नदियां सूख चुकी हैं। ग्रामीण इलाकों में लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है।
भीषण गर्मी में गिरा 15 से 25 फीट तक भूजल स्तर, सूख गए हैंडपंप
अभी अप्रैल का महीना छह दिन शेष है और भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों ने जिले के भूजल स्तर को संकटपूर्ण स्थिति में पहुंचा दिया है। जिले के लगभग सभी 14 प्रखंडों में पानी का स्तर औसतन 15 से 25 फीट तक नीचे खिसक चुका है, जिसके कारण हजारों चापाकल अब निरर्थक हो कर रह गए हैं। जिले में जल संकट भयावह रूप लेता जा रहा है। सूर्य की तपिश और पारा 42 डिग्री के पार जाने के साथ ही जिले का भूजल स्तर रिकॉर्ड स्तर काफी नीचे गिर गया है। स्थिति यह है कि जिले के अधिकांश प्रखंडों में वाटर लेवल पूरी तरह से भाग चुका है, जिससे हजारों सरकारी और निजी चापाकल बस सांय-सांय कर रह जा रहे हैं।
जिले की पांचों नदी सहित कई उप नदियां सूखीं
हालांकि प्रशासन द्वारा चापाकल मरम्मत दल को सक्रिय कर दिया गया है। लेकिन धरातल पर परिणाम अनुकूल नहीं दिख रहा है। भूजल की भारी गिरावट ने पेयजल का संकट तो खड़ा किया ही है, साथ ही मवेशियों के लिए भी परेशानी का सबब बन गया है। जिले की सभी पांच प्रमुख नदियां खुरी, सकरी, धनार्जय, तिलैया और ढाढर पूरी तरह से सूख चुकी हैं। इनके साथ की उपनदियां पंचाने, नाटी, बघैल आदि के भी सूखने का सीधा असर आसपास के इलाकों के जल स्तर पर पड़ा है। ग्रामीण इलाकों में स्थिति यह है कि नल-जल योजना के तहत लगी टंकियां भी अब पर्याप्त पानी नहीं खींच पा रही हैं, क्योंकि बोरिंग के पाइप पानी की सतह तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि नदियों में अनियंत्रित बालू उठाव और तालाबों के अतिक्रमण ने स्थिति को और भयावह बना दिया है।
सूखते जलस्रोत पर चिंता जताते दिख रहे विशेषज्ञ
जिला भौगोलिक रूप से पथरीली और अर्ध-शुष्क भूमि का क्षेत्र है। जिले के भूगोलवेत्ता प्रो.अनुज कुमार ने बताया कि जिले में जलस्तर गिरने की समस्या हर साल होती थी, लेकिन साल-दर-साल गिरावट की गति चौंकाने वाली है। जिले की नदियों की रेतीली सतह अब तप रही है, जिससे आसपास के क्षेत्रों का रिचार्ज सिस्टम ठप हो गया है। अंधाधुंध बोरिंग और भूजल के अनियंत्रित दोहन ने स्थिति को और भी गंभीर कर दिया है। भूगोलवेत्ता डॉ.गणेश शर्मा कहते हैं कि जहां पहले 100 से 150 फीट पर पानी मिल जाता था, वहां अब कहीं-कहीं 200 फीट से ऊपर तक बोरिंग करने के बाद भी पानी मिल जाने की गारंटी नहीं रहती है। स्थिति की गंभीरता इससे ही जाना जा सकता है कि जिले के सभी 14 प्रखंडों में वाटर लेवल सामान्य से औसतन 15 से 30 फीट तक नीचे जा चुका है।
गहराते जल संकट से सामने खड़ी हैं अनेक चुनौतियां
जिले के ग्रामीण इलाकों में गहराते जल संकट से अनेक चुनौतियां सामने हैं। जिन गांवों में नल-जल योजना की बोरिंग कम गहराई वाली थी, वे अब पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। लोग पुराने कुओं के बचे-खुचे दूषित पानी को छानकर पीने पर मजबूर हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इंसानों के साथ-साथ मवेशियों की स्थिति और भी दयनीय है। जिले के अधिकांश तालाब और आहर सूखकर मैदान बन चुके हैं। पशु बेतरह प्यासे रह रहे हैं, जिससे पशुपालकों की परेशानी बढ़ी हुई है।
जिले के प्रखंडों में जल स्तर में गिरावट का विवरण
प्रखंड का नाम जल स्तर में गिरावट नवादा सदर 15-18
फीट रजौली 20-22 फीट अकबरपुर 15-17 फीट
हिसुआ 12-15 फीट
नारदीगंज 18-20 फीट
वारिसलीगंज 10-12 फीट पकरीबरावां 15-18 फीट
गोविन्दपुर 18-21 फीट
मेसकौर 17-19 फीट
सिरदला 20-25 फीट
रोह 14-16 फीट काशीचक 09-11 फीट
कौआकोल 16-20 फीट
नरहट 12-14 फीट
गंगा जल आपूर्ति योजना से है उम्मीद, पर चुनौतियां बरकरार
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा नवादा में गंगा जल आपूर्ति योजना का शुभारंभ एक ठोस कदम रहा है। नवादा के पौरा स्थित मास्टर अंडरग्राउंड रिजर्वोयर से शहर के कई इलाकों में शुद्ध पेयजल पहुंचाया जा रहा है। हालांकि, यह योजना मुख्य रूप से शहरी क्षेत्र तक ही सीमित है। बल्कि नवादा शहर के सभी वार्डों तक भी इसकी पहुंच नहीं है। जहां से इसकी पाइपलाइन गुजरी है, वहां के गांवों तक को इसका कोई फायदा अभी तक नहीं मिल पा रहा है। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में इस योजना का कोई लाभ मिल भी पाएगा या नहीं, यह सवाल मुंह बाए सामने है। कुल मिला कर पानी का अपव्यय रोकने से लेकर वर्षा जल संचयन आदि को पेयजल संकट का निदान माना जा रहा है, जो विशेषज्ञ बार-बार दोहरा रहे हैं।
भईया जी की रिपोर्ट