पटना, 28 मार्च 2026: पटना के बापू सभागार में आयोजित मगही महोत्सव 2026 के उद्घाटन समारोह में बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष ने भाग लिया और इसे भाषा, संस्कृति एवं परंपराओं का जीवंत उत्सव बताया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मगही महोत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पहचान और जड़ों का प्रतीक है। मगही भाषा मगध क्षेत्र की प्रमुख भाषा रही है, जिसने सदियों से अपनी परंपराओं, लोकजीवन और सांस्कृतिक मूल्यों को संजोकर रखा है। यह वही ऐतिहासिक मगध की भूमि है, जहां से ज्ञान, सभ्यता और संस्कृति का प्रकाश पूरे विश्व में फैला।
अध्यक्ष ने कहा कि मगही भाषा के लोकगीत, कहानियाँ, मुहावरे और लोककथाएँ हमारी संस्कृति का अमूल्य खजाना हैं। इसकी सरलता और मिठास इसे विशेष बनाती है। लोकगीतों में जीवन की सादगी, प्रेम, संघर्ष और उल्लास की झलक मिलती है, जबकि नाटक और नृत्य परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह महोत्सव केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि कलाकारों, साहित्यकारों और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का महत्वपूर्ण मंच है। यह नई पीढ़ी को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी है।
वैश्वीकरण के इस दौर में स्थानीय भाषाओं और संस्कृतियों के सामने अस्तित्व का संकट है। ऐसे में मगही महोत्सव हमें अपनी धरोहर को सहेजने और अपनी पहचान को बनाए रखने की प्रेरणा देता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे मगही भाषा को शिक्षा, साहित्य और दैनिक जीवन में अधिक से अधिक अपनाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी संस्कृति पर गर्व कर सकें।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने आयोजकों उज्ज्वल कुमार, रविशंकर उपाध्याय, विजेता चंदेल और निराला विदेशिया सहित सभी सहयोगियों को धन्यवाद देते हुए इस आयोजन को भाषा और संस्कृति के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण आंदोलन बताया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में गणमान्य अतिथि, कलाकार और दर्शक उपस्थित रहे।