भारतीय जनता पार्टी विचार धारा आधारित कैडर पार्टी है। भारतीय जनसंघ से लेकर भाजपा तक की यात्रा में इस पार्टी ने अपनी एक विशिष्ट रीति-नीति विकसित की है जो लिखित संविधान से ज्यादा व्यावहारिक और संस्कारगत है। इस पार्टी का तेजी से विस्तार हुआ है। इतना विस्तार कि भाजपा आज विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गयी है। विस्तार के परिणाम स्वरूप इस दल में दूसरी पार्टियों के कार्यकर्ता और नेताओं का बड़े पैमाने पर प्रवेश हुआ है। जाहिर है कि ऐसे लोगों के व्यवहार और सोच में अपनी पुरानी पार्टी की रीति-नीति और सांगठनिक संस्कारों का प्रभाव भी होगा। लगातार सरकार में रहने के कारण भाजपा के सांगठनिक संरचना में भी पूर्व की तुलना में परिवर्तन हुए हैं जो व्यवहारों में परिलक्षित होते रहे हैं।
भाजपा को चलाने वाली टोली यानी नीति निर्धारकों तक पार्टी की मौलिक विशेषताओं में ह्रास की प्रामाणिक जानकारियां सतत पहुंच रही थीं। यह टोली विस्तार के बाद भी भाजपा संगठन की आंतरिक विशेषताएं किसी भी सूरत में बनाए रखने पर सहमत थी। ऐसे में काफी मनन-चिंतन के बाद कुछ मानक तय हुए। इस मानक पर व्यक्ति के चयन की अंतिम जिम्मेदारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी गयी। पूरे भारत से करीब एक दर्जन नामों पर कई दिनों तक अत्यंत गुप्त तरीके से विचार किए गए। जब नाम की घोषणा हुई तो बड़े नेता भी बिना किसी संकोच के नये अध्यक्ष नितिन नवीन के पीछे खड़े हो गए। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का चयन, भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नीतीन गड़करी का चयन, यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्य नाथ का चयन लगभग इसी तरह से हुआ था। व्यक्ति की जगहं संगठन के महत्व को स्थापित करने वाले ऐसे निर्णयों से सामान्य लोगों के साथ ही राजनीतिक पंडित भी भौंचक रह जाते हैं। लेकिन यह भाजपा संगठन की मौलिक विशेषता है जिसे वह बरकरार रखना चाहती है।
खरमास शुरू होने के ठीक एक दिन पहले भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने एक बार फिर पूरे देश को चौंकाया। झटके में अब तक के सबसे युवा कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन का नाम 14 दिसम्बर, 2025 की शाम सामने आया। सभी भौंचक रह गए। बधाइयों व शुभकामनाओं का तांता लग गया। मगर यह अनायास नहीं हुआ। 12 दिसम्बर को भाजपा संसदीय बोर्ड की वर्चुअल बैठक में सदस्यों से अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए संभावित गुणों की लिस्ट मांगी गई। इसके बाद एक फाइनल लिस्ट तैयार हुई। इसमें मोटे तौर पर सबसे ज्यादा बार 4-5 बातें दोहराई गई थीं, जो इस प्रकार थीं-1. युवा चेहरा 2. संगठन और पार्टी में तालमेल बैठाए 3. विवादित न हो 4. संघ और पार्टी दोनों का बैकग्राउंड हो और 5. हिंदी भाषी हो।हालांकि पार्लियामेंट्री बोर्ड मेंबर्स की 45-50 मिनट तक चली मीटिंग में न किसी नाम की चर्चा हुई और न ही ये कहा गया कि 2 दिन बाद ही पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के नाम का ऐलान हो जाएगा। मगर, दो दिन के अंदर ही पीएम श्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय संगठन मंत्री बी. एल.संतोष ने इन पांचों कसौटियों पर नितिन नवीन को खरा पाया।

बंगाल और पूर्वाेत्तर साधने की मंशा
नितिन नवीन बिहार के पहले नेता हैं, जिन्हें भाजपा ने बड़ी जिम्मेदारी दी है। यह बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। पार्टी का फोकस पूर्व यानी बंगाल और पूर्वाेत्तर को साधने पर है।
बिहार, झारखंड, बंगाल, ओडिशा और पूर्वाेत्तर में भाजपा अपने दम पर मजबूत होना चाहती है। इसकी गुंजाइश भी बहुत है।
नितिन नवीन की जिम्मेदारी होगी कि वे इन राज्यों के संगठन को एक साझा नैरेटिव में पिरोकर 2026 के लिए ‘ईस्ट $ नॉर्थ-ईस्ट फ्रंट’ को मजबूती दें। नितिन नवीन सिक्किम के चुनाव प्रभारी रह चुके हैं। अगले साल पांच राज्यों के चुनाव हैं। नितिन के जरिए भाजपा चुनावी राज्यों को साधेगी। तत्काल प्रभाव से राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त 45 वर्षीय नितिन नवीन के खाते में छतीसगढ़ की चुनावी सफलता दर्ज है।संगठनात्मक तौर पर कई अन्य राज्यों के चुनावों में भी इनकी अहम भूमिका रही है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को हटाने में इनकी भूमिका की सराहना हुई थी। नितिन की पहचान साइलेंट वर्कर की रही है। संगठनात्मक कामों में श्रेष्ठ और खेमेबाजी से दूर रहना इनके पक्ष में गया। सिक्किम में प्रभारी रहते पहली बार इनके प्रयास से भाजपा के दो विधायक जीते थे।
नितिन नवीन को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया था। कांग्रेस के स्ट्रॉन्ग होल्ड वाले राज्य में सरकार बनाने में नितिन नबीन की अहम भूमिका थी। इन्होंने कई बड़े सांगठनिक बदलाव किए थे, जिसका फायदा बीजेपी को मिला था।
नितिन भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष और राष्ट्रीय महामंत्री रह चुके हैं।
छतीसगढ़ में नितिन नवीन ने एक ओर बूथ स्तर पर मजबूत कार्यकर्ता नेटवर्क बनाया। दूसरी ओर मोहल्ला मीटिंग्स, छोटे कार्यक्रमों और व्यक्तिगत संपर्क के जरिए पार्टी की इमेज मजबूत की। यही काम उनको बिहार-बंगाल और पूर्वाेत्तर के राज्यों में करना है।
मौजूदा भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल 22 जनवरी, 2026 तक है। उनके पदमुक्त होने पर नवीन को पूर्ण अध्यक्ष बनाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो नितिन भाजपा के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष होंगे। 23 मई 1980 को जन्मे सौम्य स्वाभाव वाले नितिन बिहार के बांकीपुर से विधायक हैं। उन्होंने विद्यार्थी परिषद से छात्र राजनीति में एंट्री की थी। 26 वर्ष की उम्र में पहली बार विधायक बने। 5 बार से विधायक है। पिता नवीन किशेर सिन्हा भी 7 बार विधायक रहे थे।

आर एस एस का प्रयोग सफल
आरएसएस 15 साल बाद भाजपा में फिर वही प्रयोग कराने में सफल रहा, जो उसने नितिन गडकरी को लेकर किया था। 2009 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह का कार्यकाल समाप्त होने वाला था। तब अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, अनंत कुमार और वैकेया नायडू अध्यक्ष पद के बड़े दावेदार थे। लेकिन, तब संघ ने स्पष्ट कर दिया था कि डी 4 (दिल्ली फोर में से कोई) स्थान नहीं लेगा फिर अचानक गड़करी को अध्यक्ष बनाया गया था। हालांकि संघ ने इस बार सार्वजनिक तौर पर आपत्ति नहीं जताई। लेकिन, जिस तरह से नितिन के नाम की घोषणा हुई, उससे स्पष्ट है कि संघ ने दिल्ली की जगह क्षेत्रीय पसंद को प्राथमिकता दी।
युवाओं को लाने का रास्ता साफ
नितिन के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के साथ ही भाजपा में 80 प्रतिशत युवाओं को आगे लाने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, नई टीम बनाने में अभी जल्दीबाजी नहीं की जाएगी लेकिन इतना साफ है कि टीम में महामंत्री और मंत्री जैसे प्रमुख पदों पर ज्यादातर 50 से कम उम्र के होंगे। अगले साल 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं। नितिन टीम इसी के अनुरूप बनेगी।
नितिन मोदी-शाह के पसन्द
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी त्वरित प्रतिक्रिया में कहा कि- ‘नितिन ने मेहनती कार्यकर्ता के तौर पर अपनी पहचान बनाई है। वे युवा और परिश्रमी नेता हैं, जिनके पास समृद्ध संगठनात्मक अनुभव है।’
बताया जाता है कि नितिन के नाम पर शाह भी पूरी तरह सहमत थे। शाह के घर पर पार्लियामेंट्री बोर्ड की हुई बैठक में संगठन मंत्री बी.एल. संतोष की सहमति के बाद शाह ने ही 14 दिसम्बर की दोपहर में महामंत्री अरुण सिंह को मोबाइल कॉल करके नितिन नवीन के नाम से राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का पत्र जारी करने का निर्देश दिया था। इसके पहले इन तीनों के अलावा किसी को भी इस नाम की भनक भी नहीं थी।
अपने नाम की घोषणा के बाद नितिन ने ठीक ही कहा कि-‘ये सम्मान भाजपा में ही संभव है। पार्टी हर कार्यकर्ता के काम को देखती है।’

बिहार के पहले नेता को इतनी बड़ी जिम्मेवारी
नितिन बिहार के पहले नेता हैं, जिन्हें भाजपा ने इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है। दरअसल यह बड़ी रणनीति का हिस्सा है। वे इस पद पर पहुंचने वाले सबसे युवा नेता हैं। उम्र है महज 45 साल। अमित शाह जब अध्यक्ष बने थे तो उनसे 5 साल बड़े यानी 50 साल के थे। प्रधानमंत्री अक्सर कहा करते है कि राजनीति की नैरेटिव बदल चुकी है। एम$वाई का मतलब अब महिला$युवा है। नितिन के जरिए भाजपा का स्पष्ट संदेश है कि 55 साल के राहुल गांधी नहीं, 45 साल के नितिन नवीन युवा है। विकसित भारत/2047 के लक्ष्य को अगर साधना है तो युवाओं में पार्टी को भरोसा पैदा करना होगा। अगले कुछ सालों में भाजपा पार्टी के बी लाइन को मेंन स्ट्रीम में लाने की रणनीति पर भी कम कर रही है। बिहार की जीत ने भाजपा को एक नई उम्मीद है।
यह ठीक है कि नितिन नवीन को भी इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलने की भनक नहीं थी। वे पटना में अपने रूटीन कार्यक्रम में व्यस्त थे। अचानक दोपहर 3 बजे उन्हें एक फोन आया और उन्होंने सारे कार्यक्रम रद्द कर दिए।
नितिन अपने पटना वाले आवास पहुंचे। इसके बाद एक-एक कर पार्टी के बड़े नेता पहुंचने लगे। सबसे पहले डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी पहुंचे। उनके सामने ही उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की संगठन मंत्री बी.एल.संतोष से जानकारी मिली। यह बिहार के हवाबाज भाजपाइयों के लिए भी एक सन्देश है। पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि दावा करने या माहौल बनाने से कुछ हासिल नहीं होगा। धरातल पर काम करना होगा।
ओबीसी को सत्ता, फॉरवर्ड को पार्टी
इस बार भी भाजपा ने पार्टी और सत्ता में ओबीसी-फॉरवर्ड कॉम्बिनेशन को रिपीट किया है। जेपी नड्डा ब्राह्मण समाज से आते हैं। उनकी जगह पार्टी ने कायस्थ समाज से आने वाले नितिन को रिप्लेस कर फॉरवर्ड-ओबीसी कॉम्बिनेशन को मजबूत किया है।
मोदी ओबीसी समाज से आते हैं, ऐसे में पार्टी की कमान फॉरवर्ड समाज को दी गई है।
भाजपा ने सधी हुई रणनीति के तहत समीकरण साधा है। उसे पता है कि अपने कोर वोटर को कैसे सहेजना है। भाजपा जब शून्य थी तब उसकी ताकत फॉरवर्ड होते थे। अब जब वह अपने शीर्ष पर है तो उन्हें छोड़ना नहीं चाह रही है।