बिहार विधानसभा में आज बजट सत्र के 12वें दिन भी पक्ष और विपक्ष के बीच शराबबंदी, आरक्षण, कानून व्यवस्था समेत अलग—अलग मुद्दों को लेकर तीखी तकरार हुई। नीतीश सरकार की शराबबंदी नीति पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि बिहार में शराबबंदी पूरी तरह फेल है। कांग्रेस के विधायक अभिषेक रंजन ने आरोप लगाया कि बिहार पुलिस शराब की ब्रिकी पर अंकुश नहीं लगा पा रही है। खुलेआम शराब बेची जा रही है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि आज सूबे में हालात ऐसे है कि अगर डिमांड किया जाए तो विधानसभा में भी शराब की डिलिवरी हो जाएगी। यही नहीं, अगर पुलिस वालों की जांच की जाए तो पता चल जाएगा कि किसने शराब पी और किसने नहीं। इसपर जदयू के विधायक विनय चौधरी ने सदन में तेजस्वी यादव के शराब पर पीकर आने का आरोप लगाया। जदयू विधायक ने कहा कि जब हमलोगों ने उनके मेडिकल जांच की बात कही तो वे सदन से भाग गए। इसके बाद सदन में राजद के सदस्य हंगामा करने लगे। कांग्रेस विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि राज्य में शराबबंदी के बावजूद खुलेआम शराब घरों में बनाई और बेची जा रही है
आरक्षण बढ़ाने की मांग पर विपक्ष का हंगामा
दरअसल, आज सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद प्रश्नकाल के दौरान सवाल जवाब हुए। मंत्रियों ने पक्ष—विपक्ष के सदस्योंं द्वारा पूछे प्रश्नों के जवाब दिये। इसके बाद शराबबंदी पर चर्चा हुई और फिर विपक्ष ने आरक्षण सीमा बढ़ाने की मांग उठाई। राजद विधायक रणविजय साहू ने कहा कि बिहार की महागठबंधन सरकार ने राज्य की 13.7 करोड़ जनता की जाति आधारित गणना के आधर पर आरक्षरण की सीमा को बढ़ाकर 65 प्रतिशत कर दिया था। पिछले 35 साल से तमिलनाडु में आरक्षण की सीमा 69 प्रतिशत है। उस वक्त केंद्र सरकार ने इसे नौंवी अनुसूची में शामिल करवा दिया था। लेकिन, बिहार की आरक्षण सीमा को बढ़ाने के कानून को न्याययिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि, इसे केंद्र सरकार ने नौंवी अनुसूची का संरक्षण नहीं दिया। इसलिए सरकार सारे पूर्व निधार्रित कार्यक्रमों को स्थगित कर गरीबों और वंचितों के हितों की रक्षा के लिए सरकार एक सशक्त कमेटी का गठन करे। जो समयबद्ध सीमा के अंदर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करे और इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार नया विधेयक लाकर कानून पारित करे।
वेल में राजद का हंगामा, वाकआउट
विपक्षी राजद ने कहा कि राज्य सरकार इसके साथ ही केंद्र सरकार पर आरक्षण बढ़ाने की सीमा को नौंवी अनुसूची में शामिल कराने का दबाव बनाए। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें बैठने के लिए कहा तो विपक्ष के विधायक वेल में आकर हंगामा करने लगे। वह आरक्षण की सीमा बढ़ाने की मांग करने लगे। इसपर भी जब मामला शांत नहीं हुआ तो विपक्षी सदस्य सदन से वॉकआउट कर गए। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को दिन के 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। मालूम हो कि आज सत्र शुरू होने से पहले ही सदन के गेट पर विपक्षी विधायकों ने आरक्षण का दयरा बढ़ाने को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी थी। वे आरक्षण के मौजूदा दायरे 65 प्रतिशत को संविधान की नौवीं अनुसूचि में शामिल करने की मांग कर रहे थे।
अशोक चौधरी ने किया काउंटर अटैक
राजद विधायकों के हंगामा करने पर मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष के विधायकों का विश्वास ही नहीं है। इसलिए जनता ने हाल के विधानसभा चुनाव में इनलोगों को महज 25 सीटों पर पहुंचा दिया। जनता पर इनका विश्वास ही नहीं है। आज ये लोग यहां जातीय गणना के नाम लड़ाई लड़ रहे हैं कि 50 सीट पर सिमटो। जब इनकी सरकार थी तो अतिपिछड़ों के लिए जननायक कर्पूरी ठाकुर ने जो आरक्षण व्यवस्था लागू की थी, उसे तो इनलोगों ने खत्म ही कर दिया। जब तक जनता पर विश्वास नहीं होगा और संख्या नहीं बढ़ेगी तब तक वेल में आकर हंगामा करने से क्या फायदा है? ये लोग बस सरकार और आमलोगोंं का वक्त बर्बाद करना चाहते हैं।