भारतीय ज्ञान-परम्परा, संस्कृत अध्ययन, अनुसंधान एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए राष्ट्रीय स्तर पर लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली ने एक बार फिर अपनी अकादमिक श्रेष्ठता का परिचय दिया है। विश्वविद्यालय के तीन प्रतिभाशाली शोधार्थियों—अंकित उपाध्याय, दुर्गा प्रसाद मिश्र एवं दीपक मिश्र का उत्तर प्रदेश पीजीटी प्रवक्ता परीक्षा में चयन हुआ है। इस उल्लेखनीय सफलता से सम्पूर्ण विश्वविद्यालय परिवार में हर्ष एवं गर्व व्याप्त है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक के दूरदर्शी नेतृत्व, शैक्षणिक प्रतिबद्धता एवं अनुसंधानोन्मुख कार्य-संस्कृति का सशक्त प्रतिफल मानी जा रही है। प्रो. पाठक के नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने न केवल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप भारतीय ज्ञान-परम्परा को आधुनिक संदर्भों से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है, बल्कि विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के सर्वांगीण विकास, गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, रोजगारोन्मुख शिक्षा तथा अकादमिक उत्कृष्टता के लिए भी एक सुदृढ़ एवं प्रेरणादायी वातावरण निर्मित किया है।
विश्वविद्यालय में विकसित सकारात्मक शैक्षणिक संस्कृति आज विद्यार्थियों की राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियों के रूप में सामने आने लगी है। इस अवसर पर कुलपति प्रो. पाठक ने कहा कि विश्वविद्यालय के तीन शोधार्थियों का उत्तर प्रदेश पीजीटी परीक्षा में चयन सम्पूर्ण विश्वविद्यालय परिवार के लिए अत्यंत गौरव एवं संतोष का विषय है। यह सफलता उनके कठिन परिश्रम, अनुशासित अध्ययन, गुरुजनों के समर्पित मार्गदर्शन तथा विश्वविद्यालय की उत्कृष्ट शैक्षणिक एवं शोध संस्कृति का प्रतिफल है। हमारा ध्येय केवल शिक्षित युवाओं का निर्माण करना नहीं, बल्कि ऐसे विद्वानों और शिक्षकों का निर्माण करना है जो भारतीय ज्ञान-परम्परा, संस्कृत भाषा एवं राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था को नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान करें। मुझे विश्वास है कि ये तीनों शोधार्थी अपने ज्ञान, चरित्र, संस्कार और कर्मनिष्ठा से राष्ट्र के भावी नागरिकों का निर्माण करेंगे तथा विश्वविद्यालय की गौरवशाली परम्परा को और अधिक समृद्ध करेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय आने वाले समय में भी शोध, नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण तथा प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों को निरंतर प्रोत्साहित करता रहेगा और उत्कृष्टता की इस परम्परा को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा। इस मौके पर विवि के कुलसचिव प्रो. पवन कुमार शर्मा ने चयनित शोधार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता विश्वविद्यालय की अकादमिक गुणवत्ता, अनुशासित अध्ययन-संस्कृति तथा गुरु-शिष्य परम्परा की सार्थकता का प्रमाण है। हमें विश्वास है कि ये शोधार्थी भावी शिक्षकों के रूप में समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे तथा विश्वविद्यालय का नाम निरंतर गौरवान्वित करेंगे।
विदित हो कि अंकित उपाध्याय ने अपनी प्रारम्भिक एवं माध्यमिक शिक्षा श्री टीबरीनाथ सांगवेद संस्कृत महाविद्यालय, बरेली तथा श्री सांगवेद संस्कृत माध्यमिक विद्यालय, नरवर-नरोरा (जनपद बुलंदशहर) से प्राप्त की। उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक, दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर तथा श्री लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से एम.फिल. एवं पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। यूजीसी-नेट एवं जेआरएफ उत्तीर्ण करने वाले अंकित अपनी सफलता का श्रेय सतत अध्ययन, आत्मानुशासन एवं गुरुजनों के मार्गदर्शन को देते हैं।दुर्गा प्रसाद मिश्र, उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जनपद की पुवायाँ तहसील के निवासी हैं। उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय से स्नातक शिक्षा प्राप्त की। वर्तमान में वे विश्वविद्यालय के वेद-वेदांग पीठ के व्याकरण विभाग में विद्यावारिधि (पीएच.डी.) के शोधार्थी हैं। उन्होंने संस्कृत पारम्परिक विषय (कोड–73) में यूजीसी-नेट-जेआरएफ परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया तथा संस्कृत (कोड–25) में भी जेआरएफ उत्तीर्ण किया। उनकी यह उपलब्धि उनकी असाधारण मेधा एवं अध्ययनशीलता का परिचायक है।दीपक मिश्र ने चित्रकूट की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक भूमि से अपनी शिक्षा-यात्रा प्रारम्भ की। श्री राम संस्कृत महाविद्यालय, जानकीकुण्ड से प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से साहित्य विषय में शास्त्री तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से संस्कृत विषय में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। उन्होंने प्रथम प्रयास में ही यूजीसी-नेट-जेआरएफ परीक्षा उत्तीर्ण की। वर्तमान में वे विश्वविद्यालय के साहित्य एवं संस्कृति पीठ के साहित्य विभाग में विद्यावारिधि (पीएच.डी.) के चतुर्थ वर्ष के शोधार्थी हैं। उनके अनेक शोध-पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। सीमित संसाधनों के बीच संघर्ष, साधना एवं समर्पण से अर्जित उनकी सफलता युवाओं के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है।
उल्लेखनीय है कि अंकित उपाध्याय एवं दुर्गा प्रसाद मिश्र विश्वविद्यालय के वेद-वेदांग पीठ के व्याकरण विभाग के शोधार्थी हैं, जबकि दीपक मिश्र साहित्य एवं संस्कृति पीठ के साहित्य विभाग में शोधरत हैं।इस अवसर पर वेद-वेदांग पीठाध्यक्ष, साहित्य एवं संस्कृति पीठाध्यक्ष, दोनों विभागों के विभागाध्यक्षों, शोध-निर्देशकों, समस्त आचार्यों एवं संकाय सदस्यों ने चयनित शोधार्थियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की समृद्ध शैक्षणिक परम्परा, अनुसंधान की गुणवत्ता तथा गुरु-शिष्य परम्परा की जीवंत सफलता का प्रमाण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि तीनों शोधार्थी भावी पीढ़ी के निर्माण में आदर्श शिक्षक, उत्कृष्ट शोधकर्ता एवं संस्कृत-जगत के समर्थ प्रतिनिधि के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेंगे।विश्वविद्यालय परिवार ने इस अवसर पर पुनः यह संकल्प व्यक्त किया कि कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक के प्रेरणादायी नेतृत्व में श्री लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान-परम्परा, संस्कृत भाषा, शोध, नवाचार, वैश्विक अकादमिक सहयोग तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों की प्रभावी क्रियान्विति के माध्यम से शिक्षा-जगत में उत्कृष्टता के नए कीर्तिमान स्थापित करता रहेगा।