बिहार में विधान परिषद चुनाव नतीजों के बाद बिहार की राजनीति में एक नए समीकरण की चर्चा तेज हो गई है। RJD सुप्रीमो लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सिंगापुर से लिखे एक पोस्ट में अपने भाई तेजस्वी यादव को जीत का नया फॉर्मूला सुझाया है। रोहिणी ने कहा कि MLC चुनावों ने बिहार में बीजेपी की अगुवाई वाले NDA गठबंधन को हराने का फॉर्मूला दे दिया है। रोहिणी आचार्य के मुताबिक यदि आरजेडी और जन सुराज पार्टी एक साथ आ जाए तो NDA बिहार में साफ हो जाएगा। रोहिणी आचार्य ने एक्स पर पोस्ट में लिखा— ‘बिहार में हुए MLC चुनावों ने बिहार में BJP/NDA को हराने का फार्मूला दे दिया है। TJ + PK = BJP/NDA ZERO। राजद और जन सुराज को मिले वोट को अगर जोड़ दिया जाए तो BJP/NDA सभी 8 सीटों पर प्रथम चरण में ही हार जाएगी। आगे आगे देखिए होता है क्या।’

विपक्ष के बिखरने से हो रहा नुकसान
तेजस्वी यादव की बड़ी बहन रोहिणी आचार्य ने एक दूसरे पोस्ट में लिखा कि विपक्ष के बिखरने से हमेशा बीजेपी और एनडीए को फायदा मिला है। अगर विपक्ष एकजुट होकर सही रणनीति और मजबूत जनाधार के साथ चुनाव लड़े और वोटों का बिखराव रोके, तो बीजेपी के एनडीए गठबंधन को हराना पूरी तरह संभव है। ऐसा इसलिए क्योंकि एकजुट विपक्ष के पास अधिक मजबूत सामाजिक और राजनीतिक समीकरण हैं। बिहार में हाल में हुए MLC की आठ सीटों पर हुए स्नातक-शिक्षक चुनावों में बीजेपी और आरजेडी को 2-2 सीटों पर जीत मिली है। वहीं 2 सीट निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गई, जबकि एक-एक सीट पर जन सुराज पार्टी और JDU को जीत मिली है। इन आठों सीट में एक पर भी आरजेडी का कब्जा नहीं था। साफ है कि तेजस्वी की पार्टी को इस चुनाव में दो सीटों का फायदा हुआ है।
तेजस्वी-PK साथ तो बदलेंगे समीकरण
रोहिणी आचार्य के इस फॉर्मूले का विशलेषण करें तो यह पता चल जाएगा कि क्या सच में ऐसा करने से NDA को हराना आसान होगा। इसे हम सर्वप्रथम पटना स्नातक MLC सीट पर JDU को मिली जीत से समझते हैं। इस सीट पर जेडीयू के नीरज कुमार ने जीत हासिल की है। चुनाव में नीरज कुमार को प्रथम वरियता में कुल 16,267 वोट मिले। जबकि RJD को 14,125 और जन सुराज को 11,038 वोट मिले। इस हिसाब से रोहिणी आचार्य के फॉर्मूला पर इसे बैठाएं तो, तेजस्वी की पार्टी आरजेडी को मिले 14,125 वोट प्लस जन सुराज के 11,038 वोट मिलाकर कुल 25,163 वोट हो जाते हैं। यह आंकड़ा जेडीयू-NDA गठबंधन को मिले इसी तरह वोटों से काफी ज्यादा है। इससे तो यह कहना गलत नहीं होगा कि रोहिणी ने बिल्कुल सही फॉर्मूला बताया है। फिलहाल, रोहिणी के ताजा फॉर्मूले ने बिहार की राजनीति में विपक्षी एकता और वोटों के बंटवारे पर नई बहस छेड़ दी है। लेकिन इस पर आरजेडी या प्रशांत किशोर की ओर से कोई प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
