बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने आज शनिवार को अचानक उनके पुराने सहयोगी RCP सिंह उनके आवास पहुंच गए। वहां घंटों मुलाकात के लिए इंतजार करने के बाद अंतत: RCP सिंह को नीतीश से बिना मिले ही निराश होकर लौटना पड़ा। इसके बाद नीतीश के आवास के बाहर मौजूद RCP सिंह के समर्थक भड़क गए। उन्होंने आरोप लगाया कि जदयू के कुछ विधान परिषद सदस्यों ने RCP सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री से मिलने से रोकने के लिए साज़िश रची थी। इनलोगों ने आरसीपी को उनसे नहीं मिलने दिया। इस घटनाक्रम के बाद जदयू की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर गरमा गई है।
समर्थकों ने MLC पर लगाए आरोप
जानकारी के मुताबिक पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह आज शनिवार सुबह अपने 20-25 समर्थकों के साथ अचानक पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर पहुंचे। उन्हें वीआईपी वेटिंग एरिया में करीब 10 मिनट तक इंतज़ार करना पड़ा। इसी दौरान जब नीतीश कुमार अपने कमरे से बाहर निकले, तो उन्होंने आरसीपी सिंह को वहां बैठे देखा। नीतीश कुमार को देखते ही आरसीपी सिंह तुरंत खड़े हो गए और सम्मानपूर्वक प्रणाम किया। हालांकि नीतीश कुमार ने एक आम कार्यकर्ता की तरह महज इशारों में ही प्रणाम का जवाब दिया और अपने अंदर वाले कमरे में चले गए।
मुख्यमंत्री से मुलाकात की उम्मीद टूटने के बाद आरसीपी सिंह के समर्थक भड़क गए। समर्थकों ने आरोप लगाया कि JDU MLC संजय गांधी और विधान पार्षद ललन सराफ ने जानबूझकर साजिश रची और RCP सिंह को नीतीश कुमार से मिलने नहीं दिया। मुलाकात न होने से नाराज और आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने नीतीश आवास के बाहर ही एमएलसी संजय गांधी और ललन सराफ के खिलाफ नारेबाजी की। हालांकि, RCP सिंह न कुछ भी नहीं कहा और चले गए।
विदित हो कि RCP सिंह की JDU में वापसी की अटकलें तब जोर पकड़ गई जब कुछ माह पहले एक कार्यक्रम में नीतीश कुमार और RCP सिंह, दोनों शामिल हुए। इस कार्यक्रम के बाद RCP सिंह ने नीतीश कुमार को अपना अभिभावक बताया था और उनकी नीतियों की तारीफ की थी। जब RCP से JDU में वापसी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जल्द पता लगने की बात कही थी। RCP सिंह को पार्टी से इसलिए निकाला गया क्योंकि केंद्रीय मंत्री के तौर पर उनकी नियुक्ति को लेकर विवाद हुआ था और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उनके रिश्ते में दरार आ गई थी। 2021 में केंद्रीय कैबिनेट विस्तार के दौरान नीतीश कुमार 2 मंत्री पद चाहते थे। लेकिन, RCP सिंह ने नीतीश कुमार की सहमति के बिना केंद्रीय इस्पात मंत्री के तौर पर शपथ ले ली। इस कदम को नीतीश कुमार की इच्छा के खिलाफ माना गया।