भोजपुर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में आज बिहार सरकार ने लगभग यह स्वीकार कर लिया है कि इस मामले में पुलिस से भारी चूक हुई थी। आज गुरुवार को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर यह ऐलान किया कि इस मामले की न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकार दिवंगत भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता एवं एक परिजन को सरकारी नौकरी प्रदान करेगी। न्यायिक जांच में बिहार पुलिस के अपराध की प्राथमिक पुष्टि हो गई है। हालांकि मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद भरत तिवारी के छोटे भाई चंदन तिवारी ने मीडिया से बातचीत में बिहार सरकार के इस ऑफर को ठुकराते हुए कहा कि पहले इस फर्जी एनकाउंटर के दोषियों को सरकार गिरफ्तार करे। इसके बाद नौकरी या बाकी ऐलान करे। इससे पहले कल आरा सीजेएम कोर्ट में एसडीएम और एसडीपीओ समेत कुल 11 आरोपियों की पेशी हुई थी।
अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर फैसला
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर अपने पोस्ट में कहा कि पूरे मामले की न्यायिक जांच की जा रही है। जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की कार्रवाई करेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर भारत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिवंगत भारत तिवारी के परिवार की मदद के लिए सरकार परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी देगी। सरकार के इस फैसले से परिवार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।
परिजनों से सीएम सम्राट ने की मुलाकात
विदित हो कि बीते माह सीएम सम्राट चौधरी ने भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की थी जिस दौरान उन्हें निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया था। तब उन्होंने सोशल मीडिया पर तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था कि स्वर्गीय भरत तिवारी जी के परिवार को न्याय मिलेगा। यह एनकाउंटर 17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर में हुआ था जिसमें बिलौटी गांव के रहने वाले भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। इस घटना के बाद परिजनों ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों और जवानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई। वहीं, पुलिस का दावा था कि भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर कई राउंड फायरिंग की थी जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई।