पटना : बिहार विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान आज लोहार जाति की सामाजिक स्थिति और उनके स्वतंत्र श्रेणीकरण का मुद्दा गूंजा। विधायक सतीश कुमार यादव द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया कि मामला फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। विधायक सतीश कुमार यादव ने सदन में लोहार समुदाय की स्वतंत्र पहचान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस जाति को ‘कमार’ की उपजाति की श्रेणी में रखना तकनीकी और सामाजिक रूप से अनुचित है।
उन्होंने तर्क दिया कि लोहार समुदाय का अपना अलग इतिहास, परंपरा और सामाजिक ढांचा है। वर्गीकरण की अस्पष्टता के कारण इस समाज के युवाओं को सरकारी नौकरियों और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में भारी कठिनाइयां आ रही हैं। सरकार को लोहार जाति को एक स्वतंत्र श्रेणी के रूप में अधिसूचित करना चाहिए ताकि उन्हें उनके अधिकार मिल सकें। सतीश कुमार यादव के सवालों का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने सदन को जानकारी दी कि राज्य सरकार ने लोहार समुदाय की आर्थिक और सामाजिक पिछड़ेपन को देखते हुए उन्हें अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल करने का निर्णय लिया था और इसके लिए अधिसूचना भी जारी की गई थी। सरकार के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। वर्तमान में यह मामला न्यायाधीन है, इसलिए सरकार अंतिम निर्णय के लिए कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रही है। मंत्री ने आश्वस्त किया कि सरकार न्यायालय में समुदाय के हितों की रक्षा के लिए मजबूती से अपना पक्ष रख रही है।
मंत्री विजय चौधरी ने स्पष्ट किया कि यदि वर्गीकरण की प्रक्रिया के कारण किसी भी व्यक्ति को जाति प्रमाण पत्र या सरकारी सुविधाओं के लाभ में भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है, तो सरकार उसे गंभीरता से लेगी। संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाएंगे ताकि प्रशासनिक स्तर पर इस समुदाय को किसी भी तरह की परेशानी न हो। लोहार जाति को कमार की उपजाति से हटाकर स्वतंत्र पहचान देना। सरकार लोहारों को ST का दर्जा देने के पक्ष में है, लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में फंसा है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने का आश्वासन दिया गया।