नवादा : धनतेरस के त्योहार को लेकर नवादा में झाड़ू का बाजार सजने लगा है। सोना-चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और वाहनों की खरीदारी के बीच झाड़ू की भी खूब मांग रहती है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। संभावित मांग को देखते हुए नवादा में कारीगर दिन-रात झाड़ू तैयार करने में जुटे हैं। इस काम में पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं भी भागीदारी निभा रही हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, झाड़ू को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। जिस घर में साफ-सफाई और स्वच्छता का ध्यान रखा जाता है, वहां माता लक्ष्मी का वास होता है। धनतेरस पर नई झाड़ू घर लाने को सुख-समृद्धि और खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि नई झाड़ू घर की गंदगी के साथ दरिद्रता और नकारात्मकता को दूर करने का प्रतीक है। इसी वजह से लोग इस दिन अन्य सामानों के साथ झाड़ू की खरीदारी भी करते हैं।
नवादा में झाड़ू निर्माण के लिए दूसरे राज्यों से कच्चा माल मंगाया जा रहा है. इसके बाद स्थानीय स्तर पर झाड़ू तैयार कर बाजारों में भेजी जा रही है। त्योहार को देखते हुए उत्पादन बढ़ा दिया गया है, ताकि बाजार में मांग के अनुसार पर्याप्त मात्रा में झाड़ू उपलब्ध करायी जा सके। स्थानीय कारीगरों के साथ महिलाएं भी निर्माण कार्य में जुटी हैं।
झाड़ू निर्माता नेहाल आलम ने बताया कि इस बार धनतेरस पर नवादा शहर में करीब चार से पांच लाख झाड़ू की बिक्री होने की संभावना है। यहां से शहर के अलावा आसपास के पड़ोसी जिलों में भी झाड़ू की आपूर्ति की जाती है। बाजार में फूल वाला झाड़ू 90 से 120 रुपये प्रति पीस और नारियल का झाड़ू 25 से 80 रुपये प्रति पीस की दर से बिक रहा है। उनके अनुसार, इस बार कीमतों में करीब 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद मांग में कमी आने की उम्मीद नहीं है।

निर्माता और विक्रेताओं के अनुमान के मुताबिक, धनतेरस के दौरान नवादा में झाड़ू का कारोबार करीब तीन से साढ़े तीन करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। त्योहार नजदीक आने के साथ दुकानदारों ने भी अपना स्टॉक बढ़ाना शुरू कर दिया है। शहर के साथ आसपास के जिलों में भी आपूर्ति की तैयारी है। ऐसे में धनतेरस पर नवादा का झाड़ू बाजार भी अच्छी बिक्री की उम्मीद लगाए हुए है।
भईया जी की रिपोर्ट

