नवादा : अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में मौसम के बदले मिजाज ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ और क्षेत्रीय मौसमी बदलावों के प्रभाव से पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर बारिश हो रही है, वहीं, 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही पछुआ हवाओं ने ठंड बढ़ा दी है। दिन और रात के तापमान में गिरावट के कारण अक्टूबर के अंत में ही लोगों को दिसंबर जैसी ठंड और कनकनी का अहसास होने लगा है। मौसम के इस बदलाव के कारण लोगों को गर्म कपड़े निकालने पड़े हैं।
किसानों के लिए बेमौसम बारिश परेशानी का कारण बन गयी है। खेतों में धान की फसल में बालियां लगने और पकने का दौर चल रहा था। कई खेतों में फसल पककर तैयार थी। तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के कारण धान के पौधे खेतों में गिर गये हैं। जलजमाव से फसल के डूबने की स्थिति बन गयी है। वहीं, काटकर रखी गयी फसल भी पानी में भीग गयी है। लगातार नमी के कारण धान के दानों में अंकुरण होने, रंग काला पड़ने और फसल सड़ने का खतरा बढ़ गया है। इससे धान की गुणवत्ता और कुल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। किसानों को अपनी मेहनत और लागत पर पानी फिरने की चिंता सता रही है।
बारिश का असर आगामी रबी फसलों की बुआई पर भी पड़ रहा है। अक्टूबर का आखिरी सप्ताह आलू, सरसों, चना, मटर और अगेती गेहूं की बुआई के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन खेतों में जलजमाव के कारण बुआई का काम प्रभावित हो रहा है। जिन किसानों ने हाल ही में आलू या अन्य अगेती फसलों की बुआई की है, उन्हें बीज सड़ने की आशंका है। गोभी, टमाटर, मिर्च और अन्य हरी सब्जियों की खेती को नुकसान पहुंचने की बात सामने आ रही है। इससे आने वाले दिनों में सब्जियों की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ने की आशंका जतायी जा रही है।
मौसम में अचानक बदलाव और ठंड बढ़ने से बच्चों और बुजुर्गों को सर्दी-खांसी, वायरल बुखार और सांस संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ गया है। मौसम और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अगले 24 से 48 घंटों में बारिश नहीं थमती है, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञों ने किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने और कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थान पर रखकर तिरपाल से ढकने की सलाह दी है। बेमौसम बारिश से फसलों को हुए नुकसान को लेकर किसानों ने स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार से प्रभावित खेतों व पंचायतों का तत्काल सर्वे कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि नुकसान का आकलन कराकर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि इस आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिल सके।
भईया जी की रिपोर्ट