नवादा : जिला पदाधिकारी रवि प्रकाश की अध्यक्षता में जिला मूल्यांकन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के ग्रामीण, पेरिफेरल एवं शहरी क्षेत्रों में भूमि के वर्गीकरण, न्यूनतम मूल्य की मार्गदर्शक पंजी (MVR) की दरों के समायोजन तथा ग्रामीण एवं पेरिफेरल क्षेत्रों से शहरी क्षेत्र में उत्क्रमित मौजों के लिए भूमि की श्रेणी एवं दर निर्धारित करने से संबंधित विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग (निबंधन) की अधिसूचना के अनुसार जिले में वर्तमान प्राक्कलित न्यूनतम मूल्य की मार्गदर्शक पंजी (MVR) की दरों में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 1.6 गुणा तथा शहरी एवं पेरिफेरल क्षेत्रों के लिए 2.0 गुणा की एकमुश्त वृद्धि की गई है। विभागीय निर्देश के अनुसार राज्यभर में भूमि का वर्गीकरण एकरूप किया जाना है, ताकि भूमि के निबंधन के दौरान निर्धारित श्रेणी एवं दर के अनुरूप मूल्यांकन सुनिश्चित किया जा सके।
ग्रामीण/पेरिफेरल एवं शहरी क्षेत्रों में भूमि का वर्गीकरण किया गया है। ग्रामीण एवं पेरिफेरल क्षेत्र के अंतर्गत व्यावसायिक भूमि, औद्योगिक भूमि, आवासीय भूमि, उच्च मार्ग तथा उच्च सड़कों के दोनों तरफ की भूमि, सिंचित भूमि, असिंचित भूमि, अनुपजाऊ भूमि (बलुआही, पथरीली, दियारा एवं चंवर भूमि) आते हैं एवं शहरी एवं मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के अंतर्गत प्रधान सड़क व्यावसायिक/आवासीय भूमि, मुख्य सड़क व्यावसायिक/आवासीय भूमि, औद्योगिक भूमि, शाखा सड़क व्यावसायिक/आवासीय भूमि, अन्य सड़क (गली) आवासीय भूमि, कृषि/गैर-आवासीय भूमि आते हैं।
इसी क्रम में दिनांक 19.06.2026 को आयोजित जिला मूल्यांकन समिति की बैठक के निर्णय के आलोक में नगर परिषद नवादा सदर, हिसुआ एवं वारिसलीगंज तथा नगर पंचायत रजौली के कार्यपालक पदाधिकारियों से शहरी क्षेत्रों में अधिसूचित सड़कों की सूची मांगी गई थी। साथ ही, पेरिफेरल मौजों को चिह्नित करने के लिए नवादा, हिसुआ, वारिसलीगंज, रजौली, सिरदला एवं नारदीगंज के अंचलाधिकारियों से संबंधित सूची उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। विभागीय निर्देश के अनुसार पेरिफेरल मौजों की MVR दरों में भी निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप समायोजन किया जाना है।
बैठक के दौरान संबंधित नगर निकायों द्वारा सड़कों के वर्गीकरण के अनुसार सूची प्रस्तुत की गई। वहीं, संबंधित अंचलाधिकारियों द्वारा पेरिफेरल मौजों को चिह्नित करते हुए उनकी सूची भी समिति के समक्ष प्रस्तुत की गई। विचार-विमर्श के उपरांत उक्त सूचियों को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। इसके आधार पर ग्रामीण, पेरिफेरल एवं शहरी क्षेत्रों में भूमि की श्रेणियों तथा दरों के समायोजन, आवश्यकतानुसार श्रेणियों के विलोपन और ग्रामीण एवं पेरिफेरल क्षेत्र से शहरी क्षेत्र में उत्क्रमित मौजों के लिए भूमि के वर्गीकरण एवं दर निर्धारण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
राजस्व हित में जिला मूल्यांकन समिति द्वारा प्रमुख निर्णय लिए गए हैं, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों में 10 डिसमिल तक अंतरित की जाने वाली भूमि को यदि आवासीय श्रेणी से निम्नतर श्रेणी में दर्शाकर निबंधन के लिए प्रस्तुत किया जाता है, तो निबंधन से पूर्व संबंधित भूमि की स्थल जांच सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भूमि की वास्तविक प्रकृति के अनुरूप मूल्यांकन हो तथा संभावित राजस्व क्षति को रोका जा सके। पेरिफेरल क्षेत्र में 10 डिसमिल तक अंतरित की जाने वाली भूमि का निबंधन सिंचित श्रेणी से उच्चतर श्रेणी में ही किए जाने का निर्णय लिया गया। यदि किसी भूखंड की चौहद्दी में एक से अधिक सड़कें हों, तो उस भूखंड का मूल्यांकन उच्चतर श्रेणी वाली सड़क के आधार पर किया जाएगा। जिले के दोनों निबंधन कार्यालयों में पिछले पुनरीक्षण के बाद से भूमि का न्यूनतम निबंधन वर्ग दो फसला रहा है।
इस परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए नए भूमि वर्गीकरण की असिंचित श्रेणी में भूमि का निबंधन नहीं करने का निर्णय लिया गया। ग्रामीण एवं पेरिफेरल क्षेत्र से शहरी क्षेत्र में उत्क्रमित नवादा शहरी क्षेत्र के मौजों में प्रति खेसरा 20 डिसमिल से अधिक भूमि के अंतरण पर कृषि/गैर-आवासीय श्रेणी में निबंधन किया जाएगा। वहीं, वारिसलीगंज, हिसुआ एवं रजौली शहरी क्षेत्रों में प्रति खेसरा 12 डिसमिल से अधिक भूमि के अंतरण पर कृषि/गैर-आवासीय श्रेणी में निबंधन किया जाएगा। बैठक में अपर समाहर्त्ता, नवादा, भूमि सुधार उपसमाहर्त्ता, नवादा सदर, भूमि सुधार उपसमाहर्त्ता, नवादा सदर-02, जिला निबंधन पदाधिकारी के साथ-साथ अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।
भईया जी की रिपोर्ट
