नवादा : मगध विश्वविद्यालय की ओर से राज्यपाल सचिवालय के पत्र का हवाला देते हुए नवादा विधि महाविद्यालय समेत विश्वविद्यालय के चार सरकारी और दो संबद्धता प्राप्त विधि महाविद्यालयों में एलएलबी के तीन वर्षीय और पांच वर्षीय पाठ्यक्रमों में सत्र 2026-27 से अगले आदेश तक नामांकन पर रोक लगाने के आदेश का विरोध शुरू हो गया है। विधि महाविद्यालय के प्रबंधन और विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय पर राज्यपाल सचिवालय के निर्देश को गलत तरीके से लागू करने का आरोप लगाया है।

नामांकन पर रोक के आदेश से विद्यार्थी नाराज
महाविद्यालय में प्रथम वर्ष की परीक्षा दे चुके विद्यार्थियों सन्नी कुमार, नेहा कुमारी, सुधीर कुमार, पूनम कुमारी, कौशल कुमार मिश्रा, नितेश चंद्र, निवास कुमार, रवि रंजन कुमार, आदित्य भारद्वाज और अमन कुमार सहित अन्य ने आदेश पर सवाल उठाये हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि वे प्रथम वर्ष की परीक्षा दे चुके हैं और परिणाम का इंतजार कर रहे हैं, जबकि विश्वविद्यालय के आदेश में नये सत्र में नामांकन पर रोक लगायी गयी है।
विद्यार्थियों के अनुसार, नये सत्र के लिए जुलाई और अगस्त में ही नामांकन हो चुका है तथा 16 अगस्त से नियमित कक्षाएं भी चल रही हैं। ऐसे में सत्र 2026-27 में नामांकन पर रोक लगाने का आदेश समझ से परे है। विद्यार्थियों ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय ने आदेश वापस नहीं लिया, तो महाविद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय तक प्रदर्शन किया जायेगा।
प्रबंधन ने बताया कॉलेज को स्थायी मान्यता प्राप्त
नवादा विधि महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य श्याम किशोर मिश्रा ने कहा कि यह मगध विश्वविद्यालय का सबसे पुराना विधि महाविद्यालय है। उनके अनुसार, बिहार सरकार के मानव संसाधन विभाग के पत्रांक 15/स-1-28/95, दिनांक 15 मई 2006 के तहत कॉलेज को स्थायी मान्यता प्राप्त है। साथ ही, कॉलेज को बार काउंसिल ऑफ इंडिया से भी मान्यता मिली हुई है। यहां तीन वर्षीय और पांच वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रमों की पढ़ाई लगातार होती रही है।

प्रभारी प्राचार्य ने आरोप लगाया कि मगध विश्वविद्यालय ने राज्यपाल सचिवालय के पत्र में दिये गये निर्देशों को गलत तरीके से लागू करते हुए नये नामांकन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है।
राज्यपाल सचिवालय के पत्र में दूसरे मामले का उल्लेख
श्याम किशोर मिश्रा ने राज्यपाल सचिवालय के उसी पत्र का हवाला देते हुए गया कॉलेज, गया के रसायन विभाग के प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, वाल्मीकि इवनिंग कॉलेज, गीतानगर, नवादा को कथित रूप से गलत तरीके से मान्यता देने के मामले में प्राथमिकी संख्या 73/19, दिनांक 14 जुलाई 2019 दर्ज की गयी थी और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ सिंडिकेट ने संबंधित प्रोफेसर पर प्रतिबंध लगाया था।

प्रभारी प्राचार्य ने कहा कि राज्यपाल सचिवालय ने कॉलेज को अनापत्ति प्रमाणपत्र दिये जाने पर मगध विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति और कुलसचिव के प्रति आपत्ति जतायी थी। उनका आरोप है कि इस मामले में अब तक विश्वविद्यालय ने कार्रवाई नहीं की है।नामांकन पर रोक के आदेश को लेकर महाविद्यालय प्रबंधन और विद्यार्थियों में नाराजगी है। विद्यार्थियों ने आदेश वापस नहीं लिये जाने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
भईया जी की रिपोर्ट
