नवादा : जिला व्यवहार न्यायालय की अनन्य विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) विकास झा की अदालत ने आठ साल पुराने अपहरण मामले में आरोपी ब्रजेश कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी। बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि आरोपी और पीड़िता ने विवाह कर लिया है और दोनों के तीन बच्चे हैं। परिवारों के बीच समझौता होने का हवाला देते हुए जमानत की मांग की गयी थी। हालांकि, अदालत के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। अदालत ने इस तथ्य को महत्वपूर्ण मानते हुए आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया।
मामला थाली थाना कांड संख्या 146/2018 से जुड़ा है। प्राथमिकी के अनुसार, 5 अगस्त 2018 को एक महिला धान की रोपनी करने खेत गयी थी। इसी दौरान उसकी बेटी घर से लापता हो गयी। इसके बाद अज्ञात के खिलाफ अपहरण के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी ब्रजेश कुमार, पिता गुलजारी लाल, को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। इसके बाद 8 अक्टूबर 2026 को उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपी को निर्दोष बताते हुए उसे गांव की राजनीति में फंसाये जाने की दलील दी। उन्होंने कहा कि पीड़िता अब बालिग है और मजिस्ट्रेट के समक्ष दिये गये उसके धारा 164 के बयान में उम्र 26 वर्ष बतायी गयी है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि दोनों ने विवाह कर लिया है, उनके दो बेटे और एक बेटी हैं तथा दोनों परिवारों के बीच समझौता हो चुका है। इसी आधार पर आरोपी को जमानत देने की मांग की।
विशेष लोक अभियोजक भोला पासवान ने जमानत याचिका का विरोध किया। केस डायरी के अवलोकन के दौरान बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना के अंकपत्र में दर्ज पीड़िता की जन्मतिथि 15 दिसंबर 2002 सामने आयी. इस जन्मतिथि के अनुसार, 5 अगस्त 2018 को घटना के समय उसकी उम्र 15 वर्ष, 7 महीने और 21 दिन थी।
अदालत ने पीड़िता की उम्र से जुड़े दस्तावेजों और मामले की परिस्थितियों पर विचार किया। आदेश के अनुसार, घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी, इसी आधार पर बचाव पक्ष की ओर से शादी, बच्चों और पारिवारिक समझौते का हवाला देकर मांगी गयी राहत स्वीकार नहीं की। अदालत ने आरोपी ब्रजेश कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। इस आदेश से स्पष्ट है कि जमानत पर विचार करते समय घटना के समय पीड़िता की उम्र और मामले से जुड़े कानूनी तथ्यों को महत्व दिया गया।
भईया जी की रिपोर्ट
