नवादा : प्रधानमंत्री मुद्रा लोन दिलाने के नाम पर झांसा देकर विभिन्न राज्यों के उपभोक्ताओं से लाखों की ऑनलाइन ठगी मामले में पुलिस ने तीन आरोपितों को छापेमारी कर धर दबोचा। मामला 12 अक्टूबर की देर शाम की बतायी जाती है। तकनीकी सर्विलांस व मानवीय इंटेलिजेंस की मदद से साइबर पुलिस की एसआईटी ने तीनों को शाहपुर थाने के लाल बिगहा गांव की घेराबंदी कर दबोच लिया।

गिरफ्तार आरोपितों में दो सगे भाई हैं। जबकि एक अन्य विधि विरुद्ध किशोर बताया जाता है। छापेमारी के दौरान इनके घर से पुलिस ने 02 लाख 70 हजार रुपये कैश, 09 स्मार्ट मोबाइल फोन व 02 की-पैड मोबाइल,13 पासबुक, 04 सिम कार्ड व 123 पेज कस्टमर डेटाशीट बरामद किये गये। बताया जाता है कि इस क्रम में दो घरों में छापेमारी की गयी। परंतु इनमें से एक घर बंद पाया गया। गिरफ्तार आरोपितों में 28 वर्षीय संजय रविदास व 22 वर्षीय गुड्डू कुमार शामिल हैं। दोनों आरोपित लाल बिगहा गांव के रामवृक्ष रविदास के बेटे बताये जाते हैं।
आरंभिक पूछताछ में आरोपितों ने स्वीकार किया कि वे लोग पीएम मुद्रा लोन दिलाने का झांसा देकर लोगों से ठगी करते थे। कस्टमर डेटाशीट से नंबर निकाल कर वे लोग उपभोक्ताओं को कॉल करते थे और उन्हें तुरंत लोन दिलाने का आश्वासन देते थे। लोन अप्रूवल के नाम पर वे लोग उपभोक्ताओं से उनका आधार कार्ड, पैन कार्ड व बैंक डिटेल्स तथा फोटो आदि ले लेते थे। अप्रूवल लेटर भेजने के बाद लोन प्रोसेसिंग फीस के नाम पर वे लोग उपभाक्ताओं से ठगी करते थे। ठगी की रकम हजार से शुरू होकर लाखों में पहुंच जाती थी। रुपये मंगाने लिए वे लोग विभिन्न बैंक खातों का उपयोग करते थे। बाद में उन खातों से एटीएम कार्ड से रुपये निकाल लिये जाते थे। इनके पास से जब्त बैंक खातों का अपडेट लिया जा रहा है।
मोबाइल से मिले ठगी से जुड़े कई साक्ष्य आरोपितों के पास से मिले मोबाइल फोन से कई साक्ष्य पुलिस ने बरामद किये हैं। इनमें 123 पेज कस्टमर डेटाशीट शामिल हैं। जिसमें विभिन्न राज्यों के उपभोक्ताओं के नाम व मोबाइल नंबर दर्ज हैं। इसके अलावा ठगी से संबंधित कई स्क्रीन शॉट बरामद किये गये हैं। आरंभिक जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि आरोपितों के पास से बरामद मोबाइल फोन में कई चोरी के हैं और इनमें प्रयुक्त सिम विभिन्न राज्यों से फर्जी उपभोक्ताओं के नाम व पते से जारी किये गये हैं। इनमें यूपी व अन्य जगहों से जारी किये गये सिम शामिल हैं।

मोबाइल फोन की जांच में आरोपितों के लंबे नेटवर्क का पता चला है। बताया जाता है कि जांच टीम इस बात का पता लगा रही है कि आरोपितों के साइबर ठगी नेटवर्क में कहां-कहां के लोग शामिल हैं। जांच के मुताबिक इनमें से कई ऐसे दूसरी जगहों के नंबर हैं,जिन पर एनसीआरपी पर शिकायतें दर्ज हैं। इससे यह पता चलता है कि साइबर अपराधियों का लंबा नेटवर्क है। यह भी पता चला है कि कस्टमर डेटाशीट का आदान प्रदान भी उन नंबरों द्वारा किया गया है।
छह के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज इस मामले में 12 अक्टूबर को साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। दर्ज कांड संख्या-99/26 में छह आरोपितों को नामजद किया गया है। इनमें पकड़े गये आरोपितों के दो अन्य भाई संतोष रविदास व पंकज उर्फ सन्नी रविदास शामिल हैं। इनके अलावा एक अन्य आरोपित मनीष राउत भी इनमें शामिल हैं। मनीष लाल बिगहा गांव के हीरा राउत का बेटा बताया जाता है। आरोपितों के विरुद्ध बीएनएस की विभिन्न धाराओं में साइबर धोखाधड़ी व आईटी एक्ट के तहत आरोप लगाये गये हैं। प्राथमिकी दर्ज कर पकड़े गये दोनों आरोपितों को 13 अक्टूबर को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। जहां से इन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वहीं विधि विरुद्ध किशोर को जेजे कोर्ट में प्रस्तुत किया गया।

डीएसपी के नेतृत्व में एसआईटी साइबर डीएसपी सह साइबर थाना एसएचओ मो. शाहनवाज अख्तर के नेतृत्व में गठित एसआईटी में साइबर थाने के इंस्पेक्टर बलबीर कुमार सिंह, एसआई आलोक कुमार, सिपाही सूरज कुमार, सोनू कुमार, अमित कुमार, महिला सिपाही अन्नू कुमारी, गृहरक्षक मोनू कुमार व अवधेश कुमार तथा महिला गृहरक्षक निशा कुमारी व चालक सिपाही विवेक कुमार पासवान शामिल हैं।
अधिकारी का कहना है कि लाल बिगहा में आधा दर्जन लोगों द्वारा साइबर ठगी करने की सूचना मिली थी। सूचना के सत्यापन के बाद वरीय पदाधिकारी के निर्देश पर टीम का गठन कर छापेमारी की गयी। तीन पकड़े गये हैं। इनमें एक विधि विरुद्ध बालक है। 2.70 लाख कैश व मोबाइल आदि पकड़े गये हैं। इनलोगों द्वारा पिछले कई वर्षों से मुद्रा लोन के नाम पर लोगों से रुपये ठगे जा रहे थे। इनके गिरोह के अन्य सदस्यों का साक्ष्य मिला है। साक्ष्यों के आधार पर मामले में अग्रेतर कार्रवाई की जा रही है।
भईया जी की रिपोर्ट
