नवादा : जिले के रजौली पुलिस ने सारी सीमाएं पार कर दी है। वर्तमान थानाध्यक्ष कानून के रक्षक के बजाय भक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। तभी तो कहा जाता है कि पैसा दिया तो “ना था, दिया तो थाना” की कहावत चरितार्थ हो रही है। हो भी क्यों नहीं जब तमाम सबूतों के साथ खबरें प्रकाशित होने के बावजूद वरीय अधिकारियों से द्वारा क्लीन चिट दे दिया जाय। ऐसे में भ्रष्टाचार बढ़ना लाज़िमी है। तो यहां हम बात कर रहे हैं रजौली थाना क्षेत्र के एक गांव से अपहृत नाबालिग लड़की का। 23 सितम्बर की देर रात नाबालिग का शादी की नियत से गांव के ही युवक सनोज कुमार पंडित द्वारा अपहरण कर लिया गया। पिता के बयान पर थाना कांड संख्या 511/26 दर्ज कर अग्रेतर कार्रवाई आरंभ की गयी।

इस क्रम में नाबालिग की बरामदगी तो हुई लेकिन थानाध्यक्ष के इशारे पर अनुसंधान कर्ता अनि सचिन कुमार द्वारा उसे इतना टार्चर किया गया कि उससे न्यायालय में स्वेच्छा से जाने का बयान दर्ज करा दिया गया। आश्चर्य यह कि पीड़िता की चिकित्सकीय जांच तक नहीं करायी गयी। नियमत: बरामदगी के बाद न्यायालय में बयान व चिकित्सकिय जांच अनुसंधान के लिए आवश्यक है। वैसे भी जब लड़की नाबालिग हो भले ही स्वेच्छा से गयी हो चिकत्सकिय जांच तो बनती ही है। पीड़िता को पुलिस का व्यवहार नागवार लगा तथा वह अब एकबार पुनः परिजनों के साथ न्यायालय पहुंच बयान दर्ज करा पुलिस के काले कारनामे की पोल खोलने पहुंची गयी।
भईया जी की रिपोर्ट
